RBI ने 4 नवंबर 2026 को Technical Consultative Committee for Financial Markets का गठन किया है। इसमें SBI, Axis Bank और ICICI Bank जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। कमेटी फॉरेक्स, सरकारी सिक्योरिटीज और मनी मार्केट पर राय देगी, लेकिन इससे बैंक कर्मचारियों के लिए तुरंत कोई नया नियम लागू नहीं हुआ है।

स्थितिNot Applicable

RBI ने क्या नया फैसला किया?

Reserve Bank of India (RBI) ने 4 नवंबर 2026 को Technical Consultative Committee for Financial Markets (TCCFM) बना दी है। 7 अक्टूबर 2026 को RBI ने अपनी Developmental and Regulatory Policies वाली घोषणा में ऐसी कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा था। अब सदस्यों के नाम और कामकाज का दायरा घोषित किया गया है।

RBI की रिलीज का पाठ Nyaya Portal पर दोबारा प्रकाशित रूप में देखा गया और Business Standard तथा Mint की रिपोर्टों से मिलान किया गया। RBI की मूल प्रेस रिलीज का लिंक उपलब्ध है, लेकिन जांच के दौरान यह मूल पेज सीधे नहीं खुल सका। इसलिए सीधे मूल दस्तावेज पढ़ लेने का दावा नहीं है।

कमेटी में कौन-कौन हैं?

कमेटी की अध्यक्षता Financial Markets Regulation Department के प्रभारी RBI डिप्टी गवर्नर करेंगे। समाचार रिपोर्टों के अनुसार फिलहाल यह जिम्मेदारी रोहित जैन के पास है। सात बाहरी सदस्यों में शामिल हैं:

  • शमशेर सिंह: Fixed Income Money Market and Derivatives Association of India के चेयरमैन और State Bank of India के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर।
  • नीरज गंभीर: Axis Bank के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर।
  • शैलेन्द्र झिंगन: ICICI Bank में ट्रेजरी और इकोनॉमिक रिसर्च के प्रमुख।
  • आदित्य बागरी: Citibank India में मार्केट्स के प्रमुख।
  • अनंत नारायण: SEBI के पूर्व Whole Time Member और IIT Bombay में Professor of Practice।
  • नंद किशोर: Clearing Corporation of India Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर।
  • रिधम देसाई: Morgan Stanley India के मैनेजिंग डायरेक्टर।

ये लोग अपने काम के अनुभव के आधार पर कमेटी में हैं। केवल इनके शामिल होने से संबंधित बैंकों में नई HR या सर्विस पॉलिसी लागू नहीं होती।

कमेटी क्या काम करेगी?

यह मनी मार्केट, सरकारी बॉन्ड, फॉरेक्स और संबंधित डेरिवेटिव मार्केट की कार्यप्रणाली पर सुझाव देगी। ट्रेडिंग, क्लियरिंग, सेटलमेंट और रिपोर्टिंग सिस्टम भी इसके दायरे में हैं। बाजार की लिक्विडिटी, मजबूती, जोखिम, नई तकनीक और नियम लागू करने में होने वाली परेशानी पर भी चर्चा होगी। जरूरत पड़ने पर RBI किसी खास मुद्दे पर राय मांग सकेगा।

कमेटी की बैठक कम-से-कम हर तिमाही में एक बार होगी। इस घोषणा से ग्राहकों की फीस, ब्रांच टाइमिंग या फॉरेक्स ट्रांजैक्शन की कोई नई अनिवार्य लिमिट तय नहीं की गई है।

बैंक कर्मचारियों के लिए क्या महत्व है?

ट्रेजरी और फॉरेक्स डेस्क के कर्मचारी आगे चलकर बाजार से जुड़े सुझावों और संभावित बदलावों पर नजर रख सकते हैं। रिस्क, कंप्लायंस और ऑडिट टीम को बाद में जारी होने वाले वास्तविक RBI निर्देशों को देखना होगा।

ब्रांच कर्मचारियों के लिए अभी यह जानकारी की खबर है, नया ऑपरेशनल निर्देश नहीं। SBI के अधिकारी की सदस्यता के आधार पर RRB कर्मचारियों की सेवा शर्तों या जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं मानना चाहिए।

अगला कदम क्या होगा?

कमेटी केवल सलाह देने वाला मंच है। भविष्य में RBI कोई नियम बदले तो अलग से अधिकृत आदेश या दिशा-निर्देश देखना जरूरी होगा। 7 अक्टूबर के प्रस्ताव, 4 नवंबर के गठन और आगे के संभावित नियम में साफ अंतर रखना चाहिए।

स्रोत और संदर्भ

  1. Nyaya Portal (reproduced RBI release) — Constitution of the Technical Consultative Committee for Financial Markets (TCCFM) (2026-11-04)
  2. Business Standard — RBI forms financial markets consultative panel headed by Dy Guv Rohit Jain (2026-11-04)
  3. Mint — RBI sets up market advisory panel to address liquidity, resilience concerns (2026-11-04)
इस रिपोर्ट के बारे में
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