5 नवंबर 2026 की एक लीगल रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के उपभोक्ता आयोग ने केनरा बैंक को लगभग ₹4.14 लाख लौटाने का निर्देश दिया। 2024 में दो विवादित ट्रांसफर से लगभग ₹5.44 लाख निकले थे। मूल आदेश स्वतंत्र रूप से नहीं मिल सका है।

दिल्ली के कंज्यूमर कमीशन का रिपोर्ट किया गया फैसला

5 नवंबर 2026 को टाइम्स ऑफ इंडिया की लीगल रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने केनरा बैंक को एक महिला के खाते से हुए दो विवादित इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के मामले में रकम वापस करने का निर्देश दिया। ये ट्रांसफर 2024 में एक फर्जी फोन कॉल के बाद हुए थे। यह ग्राहक की शिकायत और बैंक के कामकाज से जुड़ा मामला है, कर्मचारियों की सैलरी या सर्विस शर्तों का फैसला नहीं।

रिपोर्ट के अनुसार खाते से करीब ₹5.44 लाख की विवादित निकासी हुई थी और करीब ₹4.14 लाख लौटाने का आदेश दिया गया। इसके अलावा ₹1 लाख मुआवजा और ₹50,000 कानूनी खर्च देने का निर्देश भी रिपोर्ट किया गया है। ये अलग-अलग मदें हैं; पूरी रकम को सिर्फ एक रिफंड बताना गलत होगा।

बैंक की दलील से विवाद क्यों खत्म नहीं हुआ

खबर के मुताबिक केनरा बैंक ने कहा कि विवादित पेमेंट ग्राहक के बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके हुए थे। लेकिन आयोग इस बात से संतुष्ट नहीं हुआ कि सिर्फ ऐसा होने से ग्राहक की स्वेच्छा से दी गई मंजूरी साबित हो जाती है या पूरी गलती ग्राहक की ही थी।

रिपोर्ट में बताया गया कि आयोग को तकनीकी रिकॉर्ड में ऐसी पर्याप्त पुष्टि नहीं मिली जो ग्राहक की वास्तविक सहमति या अकेले उसी की लापरवाही साबित कर सके। सही पासवर्ड या दूसरे क्रेडेंशियल से ट्रांजैक्शन प्रोसेस होना और ग्राहक द्वारा उसे सच में मंजूरी देना एक ही बात नहीं है। इसका यह मतलब भी नहीं कि हर प्रमाणित ट्रांजैक्शन अपने आप फ्रॉड है।

फैसले का दायरा समझना जरूरी

यह निर्देश एक खास उपभोक्ता शिकायत से जुड़ा बताया गया है। इससे ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं बनता कि केनरा बैंक या सभी बैंकों को हर साइबर-फ्रॉड शिकायत में पैसा तुरंत लौटाना ही होगा। जिम्मेदारी तय करते समय लागू RBI नियम, शिकायत की सूचना देने का समय, बैंक और ग्राहक का व्यवहार तथा उपलब्ध रिकॉर्ड देखे जाते हैं।

इस रिपोर्ट के लिए आयोग का प्रमाणित पूरा आदेश, केस नंबर, आदेश की बिल्कुल सही तारीख और किसी अपील या स्टे की स्थिति स्वतंत्र रूप से नहीं मिल सकी। इसलिए यहां रकम और तर्क टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के हवाले से दिए गए हैं; इन्हें सीधे मूल आदेश से सत्यापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया गया है।

ब्रांच और फ्रॉड-शिकायत टीम के लिए काम की बातें

विवादित ट्रांसफर की शिकायत मिलने पर बैंक स्टाफ के लिए ग्राहक की पहली सूचना का रिकॉर्ड रखना, शिकायत को सही स्तर पर पहुंचाना और जरूरी इलेक्ट्रॉनिक लॉग सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। किसी लॉगिन या कोड के सफल सत्यापन को अपने आप यह प्रमाण नहीं मान लेना चाहिए कि भुगतान उसी ग्राहक ने मंजूर किया था।

  • शिकायत कब और किस माध्यम से आई, उसकी रसीद तथा आगे भेजने का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
  • बैंक के वास्तविक रिकॉर्ड-रिटेंशन नियमों के मुताबिक ट्रांजैक्शन, चैनल और उपलब्ध तकनीकी लॉग संभालें; इनका होना अपने आप ग्राहक की सहमति का प्रमाण नहीं है।
  • अस्थायी क्रेडिट, रिकवरी, जांच या शिकायत पर निर्णय की स्थिति ग्राहक को प्रमाणित रिकॉर्ड के आधार पर बताएं।
  • इस एक रिपोर्ट किए गए फैसले को सब मामलों का सार्वभौमिक नियम मानने की जगह लागू RBI ग्राहक-सुरक्षा नियम और संबंधित बैंक की प्रक्रिया देखें।

किन बातों पर अभी पुष्टि बाकी है

आयोग के मूल आदेश से उसकी सही तारीख, केस नंबर, ब्याज की शर्तें, पालन की समय-सीमा और बाकी निर्देशों की पुष्टि की जानी चाहिए। किसी बाद की अपील या स्टे की भी जांच जरूरी है। उपलब्ध स्रोतों में केनरा बैंक के किसी खास कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक दोष साबित होने की बात नहीं कही गई है।

स्रोत और संदर्भ

इस रिपोर्ट के बारे में
स्रोत देखें, लागू होने की स्थिति जांचें और किसी गलती की जानकारी हमें दें।