श्रम मंत्रालय ने 27 अक्टूबर 2026 को बताया कि बिहार ग्रामीण बैंक में 22 और 23 अक्टूबर को दो औद्योगिक विवाद सुलह से निपटे। इनके तहत 10,900 से ज्यादा कर्मचारियों को करीब ₹77.69 करोड़ के वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है। यह पहले छूटी महत्वपूर्ण खबर की रिपोर्ट है, 5 नवंबर का नया समझौता नहीं।

किसके लिएBihar Gramin Bank officers and workmen covered by the two settlements

यह पहले छूटी हुई अहम खबर है, 5 नवंबर का नया समझौता नहीं

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 27 अक्टूबर 2026 को बताया था कि बिहार ग्रामीण बैंक में कर्मचारी संगठनों और प्रबंधन के दो औद्योगिक विवादों का समझौता 22 और 23 अक्टूबर 2026 को हुआ। यह रिपोर्ट उस महत्वपूर्ण पुराने घटनाक्रम को कवर कर रही है, जो पहले के अपडेट में छूट गया था। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई नया समझौता 5 नवंबर को हुआ या सभी कर्मचारियों के खातों में पैसा पहुंच गया है।

मंत्रालय के अनुसार, दोनों समझौतों से बिहार ग्रामीण बैंक के 10,900 से अधिक कर्मचारियों को कुल करीब ₹77.69 करोड़ के वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है। पटना के सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय) की सुलह प्रक्रिया से ये समझौते हुए। ये बिहार ग्रामीण बैंक के अपने कर्मचारी मामलों से जुड़े हैं; इन्हें बाकी ग्रामीण बैंकों के लिए सीधे लागू हुआ आदेश नहीं माना जा सकता।

दोनों समझौतों में कितने कर्मचारियों को कितना लाभ?

समझौता किसके साथ तारीख लगभग कर्मचारी संभावित वित्तीय लाभ
बिहार ग्रामीण बैंक अधिकारी संघ, पटना, और बैंक प्रबंधन 22 अक्टूबर 2026 8,400 ₹67.17 करोड़
बिहार ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन (BGBWO) और बैंक प्रबंधन 23 अक्टूबर 2026 2,500 ₹10.52 करोड़
दोनों को मिलाकर अनुमान दो समझौते 10,900 से अधिक ₹77.69 करोड़

मंत्रालय ने वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन वाले दूसरे समझौते में करीब ₹9.02 करोड़ सालाना आवर्ती लाभ का जिक्र किया है। यह ₹9.02 करोड़, दूसरे समझौते के ₹10.52 करोड़ का ही हिस्सा है। इसलिए ₹77.69 करोड़ के कुल आंकड़े में इसे दोबारा नहीं जोड़ना चाहिए। ये पूरे कर्मचारी समूह के लिए अनुमानित रकम हैं; हर कर्मचारी को बराबर राशि मिलने का दावा नहीं है।

अधिकारी संघ के समझौते में क्या-क्या मुद्दे आए?

22 अक्टूबर के समझौते में परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI), कार्यवाहक पद के भत्ते यानी officiating allowance, वेतन में सुधार, यात्रा भत्ते में बढ़ोतरी, प्रमोशन और अनुकंपा नियुक्ति जैसे कर्मचारियों से सीधे जुड़े विषय शामिल हैं। मंत्रालय की प्रेस रिलीज इन मुद्दों की पुष्टि करती है, लेकिन हर कैडर की पूरी दर, हिसाब लगाने का फॉर्मूला या भुगतान की अंतिम तारीख नहीं देती। इन बातों के लिए समझौते की असली शर्तें और बैंक का लागू करने वाला सर्कुलर देखना होगा।

वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन के समझौते में क्या है?

23 अक्टूबर के समझौते में 12वें बाइपार्टाइट सेटलमेंट को प्रभावी रूप से लागू करने, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) बढ़ाने, दिव्यांग कर्मचारियों के ट्रांसपोर्ट अलाउंस में सुधार, ओवरटाइम भुगतान, प्रमोशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और नेगोशिएटिंग काउंसिल बनाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। यह कर्मचारी सेवा शर्तों से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम है। फिर भी सिर्फ मुद्दों की सूची देखकर सभी कर्मचारियों के लिए एक जैसी नई दर तय नहीं की जा सकती।

बिहार ग्रामीण बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए क्या मायने हैं?

किसी कर्मचारी को पहले यह देखना चाहिए कि उसका कैडर किस समझौते में आता है। उसके बाद अधिकृत समझौता पत्र या बैंक/संबंधित यूनियन के सर्कुलर से पात्रता, लागू होने की तारीख, पुराने बकाये का हिसाब, संबंधित वेतन और भत्ता मद तथा भुगतान की प्रक्रिया समझनी चाहिए। इस रिपोर्ट में देखे गए आधिकारिक और समाचार स्रोत यह साबित नहीं करते कि हर कर्मचारी को उसकी व्यक्तिगत राशि पहले ही मिल चुकी है।

ये समझौते लंबित कर्मचारी मुद्दों पर बातचीत और औपचारिक सुलह से आगे बढ़ने का उदाहरण हैं। लेकिन बिहार ग्रामीण बैंक की शर्तों को उसके स्पॉन्सर बैंक पंजाब नेशनल बैंक या किसी दूसरे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों के लिए स्वतः लागू नहीं समझना चाहिए।

कौन-सी जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है?

मंत्रालय की 27 अक्टूबर की मूल प्रेस विज्ञप्ति से दोनों समझौतों, कर्मचारी संख्या और कुल अनुमानित लाभ की पुष्टि होती है। लेकिन उसमें सभी अनुच्छेदों का पूरा पाठ, प्रत्येक कर्मचारी के भुगतान का फॉर्मूला, बकाया देने की तारीख और किसी अलग आवेदन प्रक्रिया का विवरण नहीं है। भविष्य में बैंक या यूनियन का वास्तविक लागू करने वाला पत्र उपलब्ध हो, तभी उन बिंदुओं पर नई तथ्यात्मक रिपोर्ट दी जा सकती है। अभी अनुमान लगाकर कोई नई दर या भुगतान तारीख नहीं बताई जा रही है।

स्रोत और संदर्भ

इस रिपोर्ट के बारे में
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