SBI और Indian Banks’ Association (IBA) के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने कहा कि बैंकों के बीच साइबर घटनाओं की चेतावनी जल्दी पहुंचाने की व्यवस्था बनाई जा रही है। उन्नत AI खतरों की जांच के लिए सैंडबॉक्स पर भी विचार है। 3–4 नवंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार यह काम चल रहा है; अभी नया अनिवार्य नियम लागू नहीं हुआ है।
IBA के प्रमुख ने क्या बताया?
State Bank of India (SBI) के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी Indian Banks’ Association (IBA) के भी चेयरमैन हैं। उन्होंने बताया कि एक बैंक को साइबर हमले की जानकारी मिले तो दूसरे बैंकों तक भी जल्द चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था बनाने पर काम हो रहा है। साथ में उन्नत Artificial Intelligence (AI) मॉडल से जुड़े खतरों की जांच के लिए कंट्रोल्ड टेस्टिंग सैंडबॉक्स बनाने की सोच भी है। 3 नवंबर को PTI की रिपोर्ट के बाद 4 नवंबर को mid-day और The Times of India में भी उनकी बात सामने आई।
इस खबर का सबसे अहम फर्क यही है कि प्लेटफॉर्म अभी विकसित किया जा रहा है। यह किसी पूरी तरह लॉन्च हो चुके अनिवार्य सरकारी सिस्टम या बैंकों के लिए नए RBI सर्कुलर की घोषणा नहीं है।
बैंकों को आपस में साइबर अलर्ट क्यों चाहिए?
बैंक पहले से लागू नियमों के मुताबिक साइबर घटनाओं की जानकारी नियामकों और संबंधित सरकारी एजेंसियों को देते हैं। शेट्टी के मुताबिक एक बैंक से दूसरे बैंक तक चेतावनी सीधे और तेजी से पहुंचाने की अलग व्यवस्था बेहतर हो सकती है। जैसे किसी संस्थान को हमले का नया पैटर्न पता चले, तो बाकी बैंक भी अपने सिस्टम में उसी खतरे की जांच पहले से कर सकें।
लेकिन जानकारी शेयर करने का मतलब यह नहीं कि ग्राहक के अकाउंट विवरण, पासवर्ड या संवेदनशील रिकॉर्ड किसी भी ग्रुप में भेज दिए जाएं। ऐसी व्यवस्था के लिए डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा के नियम जरूरी होंगे। देखी गई रिपोर्टों में अभी अंतिम तकनीकी रूपरेखा या किस प्रकार का डेटा शेयर होगा, यह स्पष्ट नहीं है।
AI सैंडबॉक्स किस काम आएगा?
सैंडबॉक्स एक सीमित और नियंत्रित टेस्टिंग माहौल होता है। यहां नई तकनीक और संभावित साइबर कमजोरियों की जांच की जा सकती है, ताकि प्रयोग सीधे ग्राहकों के असली बैंकिंग सिस्टम पर न करना पड़े। IBA के स्तर पर ऐसे टेस्टिंग माहौल पर विचार किए जाने की बात सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार IBA AI से जुड़े साइबर जोखिमों पर व्यापक फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है। लेकिन अंतिम सैंडबॉक्स नियम, टेस्टिंग का तरीका, सभी भाग लेने वाले बैंकों की सूची या लॉन्च डेट की पुष्टि नहीं है। इसे लागू बैंकिंग पॉलिसी समझना सही नहीं होगा।
CERT-In और I4C की चेतावनियों से अंतर
अक्टूबर में CERT-In की साइबर सुरक्षा चेतावनी और 4 नवंबर को रिपोर्ट हुई I4C की पेमेंट-API सुरक्षा चेतावनी दूसरे घटनाक्रम हैं। यहां खबर बैंकों के बीच जानकारी साझा करने की IBA की पहल और AI टेस्टिंग के प्रस्ताव पर है। तीनों को एक ही आदेश या एक जैसी कानूनी बाध्यता बताना गलत होगा।
बैंक कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
- साइबर सुरक्षा टीम: भविष्य में IBA से आने वाली प्रामाणिक सूचना देखें; फिलहाल मौजूदा Incident Reporting प्रक्रिया ही अपनाएं।
- IT और डिजिटल बैंकिंग टीम: पैच, एक्सेस कंट्रोल, लॉगिंग और बैंक के मंजूर सुरक्षा उपाय लागू रखें।
- ब्रांच स्टाफ: किसी अनजान ‘IBA Cyber Alert’ ग्रुप को ग्राहक की निजी जानकारी न भेजें। संदिग्ध गतिविधि बैंक के आधिकारिक चैनल से रिपोर्ट करें।
- रिस्क और ऑडिट टीम: चेयरमैन के बयान को लागू RBI/CERT-In आदेश से अलग समझें।
अभी किन बातों की पुष्टि बाकी है?
प्लेटफॉर्म कब शुरू होगा, कौन-से बैंक जुड़ेंगे, कौन-सी जानकारी साझा की जाएगी और कोई अनिवार्य समय-सीमा होगी या नहीं—इन पर अंतिम आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। आगे IBA का वास्तविक आदेश आए तो उसी के आधार पर लागू दायित्व तय होंगे।
स्रोत और संदर्भ
- mid-day (PTI report) — IBA working on cyber incidents information sharing: CS Setty (2026-11-04)
- The Times of India — Cyber risks: Banks working on coordinated response (2026-11-04)
- Rediff Money (PTI) — IBA Tackles Cyber Threats, AI Attacks & Info Sharing in Banking (2026-11-03)
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