उत्तर प्रदेश के बहराइच में Bank of India से जुड़े एक बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) सेंटर के संचालक पर ग्राहकों की जमा रकम खाते में नहीं पहुंचाने और FD नहीं कराने के आरोप लगे हैं। पुलिस के अनुसार शिकायतें मिली हैं और रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। करीब 50 लाख रुपये की बताई जा रही रकम अभी जांच से साबित हुआ कुल नुकसान नहीं है।
बहराइच में क्या मामला सामने आया है?
बहराइच जिले के सलारगंज इलाके में कुछ ग्राहकों ने Bank of India से जुड़े एक बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) सेंटर पर पैसे जमा कराने के बाद भी खाते में रकम नहीं पहुंचने की शिकायत की है। 5 नवंबर 2026 को प्रकाशित अमर उजाला की स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोगों को बैंक में जानकारी लेने पर पता चला कि जिस रकम को वे जमा मान रहे थे, वह उनके खातों में दर्ज नहीं है। कुछ शिकायतें FD कराने के नाम पर ली गई रकम से भी जुड़ी हैं।
रिपोर्ट में BC सेंटर के संचालक का नाम शमशाद बताया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जमा रकम की रसीद दी गई, लेकिन पैसा खाते में नहीं गया। ग्राहकों के वहां पहुंचने पर सेंटर बंद मिलने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है। फिलहाल ये जांच के अधीन आरोप हैं। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी या कुल नुकसान अदालत अथवा जांच से साबित होने से पहले तय नहीं माना जा सकता।
पुलिस ने क्या जानकारी दी है?
अमर उजाला ने दरगाह थाने के प्रभारी अमितेंद्र सिंह के हवाले से बताया कि पीड़ितों की शिकायतें मिली हैं और जांच चल रही है। रिपोर्ट में एएसपी नगर आयुष विक्रम सिंह के अनुसार बैंक के सहयोग से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी और जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई होगी।
समाचार में लगभग 50 लाख रुपये की ठगी के आरोप का जिक्र है, लेकिन पुलिस का कहना था कि शिकायतकर्ताओं की संख्या अधिक होने के कारण कुल रकम अभी स्पष्ट नहीं है। एक शिकायतकर्ता ने FD कराने के लिए दिए गए 14 लाख रुपये का भी आरोप लगाया। ये दोनों आंकड़े फिलहाल आरोपों में दर्ज हैं, अंतिम सत्यापित नुकसान नहीं। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट से किसी खास FIR के दर्ज होने, गिरफ्तारी, दोषसिद्धि या अंतिम ऑडिट के पूरे होने की पुष्टि नहीं होती।
BC सेंटर और बैंक की नियमित ब्रांच में अंतर समझिए
बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट बैंक की व्यवस्था के तहत तय सेवाएं पहुंचाने वाला मध्यस्थ होता है। वह सामान्य बैंक ब्रांच जैसा नहीं होता। इस मामले में आरोप सेंटर संचालक के खिलाफ हैं। केवल इस रिपोर्ट के आधार पर Bank of India के नियमित कर्मचारियों की कोई गलती या ग्राहकों को भुगतान करने की बैंक की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। इसके लिए ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और लागू नियम देखना जरूरी है।
बैंक कर्मियों के नजरिए से यह मामला बताता है कि ग्राहक की रसीद, खाते में वास्तविक क्रेडिट और BC चैनल की रिकॉर्ड-ट्रेसिंग में फर्क होने पर शिकायत की सही जांच कितनी जरूरी है। लेकिन यह खबर Bank of India की किसी नई BC पॉलिसी, मुआवजा घोषणा या स्टाफ पर विभागीय कार्रवाई का प्रमाण नहीं है।
अभी कौन-से सवाल बाकी हैं?
- कितने ग्राहकों ने शिकायत दी है और दस्तावेजों से कितनी रकम की पुष्टि होती है?
- रसीदों, FD के अनुरोधों और बैंक के सिस्टम में दर्ज लेनदेन का मिलान क्या दिखाता है?
- पुलिस की जांच में FIR, गिरफ्तारी या दूसरे किसी नए कदम की आधिकारिक पुष्टि कब होती है?
- क्या बैंक कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण या आगे की कार्रवाई की जानकारी जारी करता है?
जिन ग्राहकों को परेशानी है, वे अपनी रसीदें और बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखें, बैंक के आधिकारिक शिकायत चैनल का उपयोग करें और पुलिस जांच से संबंधित सूचना लें। इस खबर से किसी ग्राहक को मिलने वाले मुआवजे या कानूनी हक पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकलता।
स्रोत और संदर्भ
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