UFBU के 2026–27 ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस सर्कुलर में इलाज की कई लिमिट बढ़ाई गई हैं। कार्यरत कर्मचारियों का प्रीमियम संबंधित बैंक देगा, जबकि पेंशनर्स के लिए अलग भुगतान विकल्प हैं। यह खास स्कीम SBI पर लागू नहीं है और बैंक के अपने निर्देश देखना जरूरी है।
2026–27 की मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी में क्या बदल रहा है?
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने कार्यरत और रिटायर्ड बैंक कर्मचारियों की ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस स्कीम के 2026–27 रिन्यूअल की शर्तें बताई हैं। इस व्यवस्था में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) शामिल नहीं है। UFBU का सर्कुलर नंबर 30/39/2026/72 दिनांक 2 अक्टूबर 2026 है। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) ने इसे 7 अक्टूबर को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया। इससे पहले 17 जुलाई 2026 को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और संबंधित बैंक कर्मचारी व अधिकारी यूनियनों के बीच समझौता हुआ था। उस समझौते के अनुसार नई सुविधाओं के लिए 1 नवंबर 2026 की प्रभावी तारीख बताई गई थी।
यूनियन के मुताबिक उस समय इस संयुक्त स्कीम में करीब 5.70 लाख कार्यरत कर्मचारी और 1.53 लाख रिटायर्ड कर्मचारी कवर थे। ये पुरानी व्यवस्था के कवरेज के बताए गए आंकड़े हैं, नए एनरोलमेंट या नई भर्तियों की संख्या नहीं। अपनी बैंक-विशेष पात्रता और क्लेम की शर्तों के लिए संबंधित बैंक और इंश्योरेंस कंपनी की असली पॉलिसी देखनी चाहिए।
रूम रेंट, मैटरनिटी और इलाज की नई लिमिट
| सुविधा | पहले | 2026–27 के लिए बताई गई लिमिट |
|---|---|---|
| निर्धारित मेट्रो शहरों में रोजाना रूम रेंट | ₹5,000 | ₹7,000 |
| उन्हीं शहरों में रोजाना ICU रेंट | ₹7,500 | ₹9,500 |
| नॉर्मल डिलीवरी पर मैटरनिटी बेनिफिट | ₹50,000 | ₹1,00,000 |
| सिजेरियन डिलीवरी पर मैटरनिटी बेनिफिट | ₹75,000 | ₹1,50,000 |
| कर्मचारियों को गंभीर बीमारी पर एक्स-ग्रेशिया | ₹1,00,000 | ₹2,00,000 |
| मोतियाबिंद इलाज, प्रति आंख | ₹40,000 | ₹50,000 |
| डिपेंडेंट के लिए मासिक आय की पात्रता सीमा | ₹18,000 | ₹24,000 |
रूम रेंट और ICU की बढ़ी लिमिट छह शहरों तथा उनके अर्बन एग्लोमरेशन में बताई गई है: दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद। जुलाई के समझौते के सारांश में चार मेट्रो शहर थे, लेकिन बाद के अक्टूबर सर्कुलर में साफ तौर पर छह शहर लिखे हैं। इसलिए नई रूम रेंट लिमिट को पूरे भारत में हर शहर के लिए एक जैसी नहीं मानना चाहिए।
मैटरनिटी की बढ़ी लिमिट में डिलीवरी से नवजात के डिस्चार्ज तक की तय देखभाल और एक वर्ष तक के बच्चे के पात्र वैक्सीनेशन खर्च शामिल बताए गए हैं। लेकिन ये संबंधित कुल मैटरनिटी लिमिट के भीतर हैं, ऊपर से मिलने वाली अलग असीमित रकम नहीं। पात्र कर्मचारियों के लिए IVF समेत इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट की बेस पॉलिसी में ₹2 लाख की अलग लिमिट जोड़ी गई है। इसके अलावा एल्बुमिन इन्फ्यूजन, पेरिटोनियल डायलिसिस और ओरल कीमोथेरेपी के कुछ खर्च तथा वेक्टर-बोर्न और सूचीबद्ध दुर्लभ बीमारियों के घर पर इलाज से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। वास्तविक क्लेम पॉलिसी की शर्तों पर ही निर्भर करेगा।
कार्यरत स्टाफ का प्रीमियम: बैंक के जिम्मे
UFBU सर्कुलर के मुताबिक, इस समझौते में पात्र कार्यरत कर्मचारियों का प्रीमियम बैंक देता है। नीचे दी गई प्रीमियम दरें GST के बिना हैं।
| कर्मचारी वर्ग | बेस बीमा कवर | प्रीमियम, GST अलग |
|---|---|---|
| सब-स्टाफ और क्लेरिकल स्टाफ | ₹4 लाख | ₹36,200 |
| स्केल I से V के अधिकारी | ₹5.25 लाख | ₹46,467 |
| स्केल VI और VII के अधिकारी | ₹7 लाख | ₹68,454 |
बैंक द्वारा भुगतान किए जाने वाला प्रीमियम, कर्मचारी की सैलरी से कटौती के बराबर नहीं है। लेकिन इलाज का पूरा दावा स्वीकार होगा या नहीं, यह पॉलिसी की वास्तविक लिमिट और शर्तें तय करेंगी।
रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए अलग भुगतान विकल्प
अक्टूबर के UFBU सर्कुलर में रिटायर्ड साथियों के लिए अलग प्रीमियम हैं। पति या पत्नी के साथ कवर लेने वाले रिटायरी के लिए ₹3 लाख बीमा पर ₹27,996, ₹4 लाख पर ₹32,144, ₹5.25 लाख पर ₹41,714 और ₹7 लाख पर ₹62,213 की दर बताई गई है। हर रकम पर GST अलग है। केवल एक व्यक्ति का कवर लेने पर दूसरी दर है। अतिरिक्त डिपेंडेंट और टॉप-अप के विकल्प भी हैं, जिन्हें बेस पॉलिसी का मुफ्त हिस्सा नहीं समझना चाहिए।
UFBU के अनुसार, हर बैंक मैनेजमेंट अपने निर्देश जारी करेगा। उसके बाद पेंशनर्स विकल्प देकर प्रीमियम जमा कर सकते हैं। इस सर्कुलर में सभी बैंकों के लिए एक जैसी पक्की आखिरी तारीख नहीं दी गई है। यूनियनों ने यह मांग भी उठाई है कि रिटायर्ड कर्मचारियों का प्रीमियम बैंक दे। यह अभी मांग है; इससे यह साबित नहीं होता कि सभी पेंशनर्स का प्रीमियम माफ हो चुका है।
कर्मचारी और पेंशनर्स अब क्या जांचें?
- स्कीम की पात्रता: इस खास समझौते में SBI शामिल नहीं है। बिना प्रमाण इसे सभी ग्रामीण बैंकों पर भी समान रूप से लागू न मानें।
- अपने बैंक का सर्कुलर: इंश्योरर, नेटवर्क हॉस्पिटल, क्लेम प्रक्रिया, आश्रित परिवार की पात्रता, इलाज की शर्तें और एनरोलमेंट की आखिरी तारीख जांचें।
- लिमिट के मायने: मैटरनिटी के अंदर आने वाले खर्च को अलग अतिरिक्त बेनिफिट न समझें। मेट्रो शहरों की बढ़ी रूम रेंट लिमिट भी स्थान-विशेष है।
- रिटायर्ड साथी: बेस कवर, पति या पत्नी का कवर, अतिरिक्त डिपेंडेंट और टॉप-अप की अलग कीमत समझने के बाद ही विकल्प चुनें।
जुलाई का समझौता और अक्टूबर का यूनियन सर्कुलर 1 नवंबर से शुरू होने वाले पॉलिसी वर्ष के बदलाव समझाते हैं। इन्हें बैंक और बीमा कंपनी के अंतिम ऑपरेशनल दस्तावेजों की जगह नहीं, उनके साथ पढ़ना चाहिए।
स्रोत और संदर्भ
स्रोत देखें, लागू होने की स्थिति जांचें और किसी गलती की जानकारी हमें दें।
चर्चा में शामिल हों