वित्त मंत्रालय ने ‘High Level Committee on Banking for Viksit Bharat’ का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त सुरेश एन. पटेल करेंगे। छह महीने की इस कमेटी के एजेंडे में RRB, बैंकिंग नियम, AI, साइबर सुरक्षा और स्टाफ की स्किल्स शामिल हैं। 31 अक्टूबर को AIBEA ने अपनी चिंताएं भी रखीं। अभी कमेटी बनने से बैंक कर्मचारियों के सर्विस रूल्स नहीं बदले हैं।
सरकार ने क्या फैसला लिया है?
वित्त मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को High Level Committee on Banking for Viksit Bharat बनाने की आधिकारिक घोषणा की। कमेटी का काम भारत के बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा करके ढांचागत, संस्थागत, रेगुलेटरी और कानूनी सुधारों पर सिफारिश देना है। इसका कार्यकाल छह महीने रखा गया है। 2026–27 के केंद्रीय बजट में ऐसी कमेटी की बात हुई थी; अब उसका वास्तविक गठन किया गया है।
कमेटी के अध्यक्ष सुरेश एन. पटेल हैं, जो पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त रह चुके हैं। तीन विशेषज्ञ सदस्य हैं—RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू, इंडियन बैंक की पूर्व MD एवं CEO पद्मजा चुंदुरु और RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर एन. एस. विश्वनाथन। Department of Financial Services के जॉइंट सेक्रेटरी (बैंकिंग) सदस्य सचिव रहेंगे। अलग खबरों में सदस्यों की गिनती अलग हो सकती है, क्योंकि कुछ में अध्यक्ष और सदस्य सचिव को भी कुल संख्या में जोड़ दिया जाता है। आधिकारिक नामों को ही आधार मानें।
किन बैंकिंग मुद्दों की समीक्षा होगी?
| समीक्षा का विषय | बैंक कर्मचारियों से संबंध |
|---|---|
| RRB और सहकारी बैंक के नियम | इन संस्थाओं के कानूनी और रेगुलेटरी ढांचे की समीक्षा; फिलहाल कोई खास स्टाफ-सर्विस बदलाव घोषित नहीं |
| AI और डिजिटल बैंकिंग | नई तकनीक के इस्तेमाल और साइबर रिस्क से बचाव के सुझाव; आगे ट्रेनिंग और कंट्रोल से जुड़ी बातें उठ सकती हैं |
| टैलेंट और स्किल्स | भविष्य के बैंकिंग स्टाफ की भर्ती और क्षमता बढ़ाने की रणनीति पर सिफारिश; अभी प्रमोशन या भर्ती नियम नहीं बदले |
| Priority Sector Lending और Lead Bank Scheme | ब्रांच और ग्रामीण बैंकिंग में महत्वपूर्ण क्रेडिट-डिलीवरी एवं समन्वय व्यवस्था की समीक्षा |
| पूंजी और रेगुलेटरी मानक | बैंकों की लंबी अवधि की वित्तीय जरूरतें; सीधे किसी कर्मचारी के वेतन या पेंशन में बदलाव नहीं |
सरकारी Terms of Reference में विकास वित्त संस्थाओं और NBFC की पूंजी जरूरत, बिजनेस के लिए पूंजी लागत और भविष्य में सरकार द्वारा भेजे जाने वाले अन्य विषय भी शामिल हैं। समीक्षा का एजेंडा किसी बैंक के मर्जर, स्टाफ कटौती, प्रमोशन बदलाव या नए ब्रांच टारगेट का अंतिम फैसला नहीं है।
AIBEA ने 31 अक्टूबर को क्या कहा?
ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) ने 31 अक्टूबर 2026 को सर्कुलर 30/46/2026/79 जारी किया। इसमें कमेटी की जानकारी और काम के दायरे का जिक्र है। यूनियन ने सदस्यों से भविष्य के बैंकिंग सुधारों की दिशा पर नजर रखने को कहा। AIBEA ने इसे सरकारी बैंकों के निजीकरण तथा सार्वजनिक बैंकिंग की भूमिका पर अपने पुराने विरोध और चिंताओं के संदर्भ में रखा।
यह यूनियन का पक्ष और उसकी आशंकाएं हैं, कमेटी की घोषित सिफारिशें नहीं। इससे यह साबित नहीं होता कि कमेटी निजीकरण, बैंक मर्जर, नौकरी में कटौती या पेंशन में बदलाव की सिफारिश करेगी। वित्त मंत्रालय की रिलीज में समीक्षा के विषय दिए गए हैं, अंतिम नीति नहीं। न 30 अक्टूबर की घोषणा और न 31 अक्टूबर का यूनियन सर्कुलर अपने-आप कर्मचारियों के मौजूदा वेतन या सर्विस हक बदलते हैं।
PSB और RRB स्टाफ के लिए क्या जरूरी है?
- RRB कर्मचारी: ग्रामीण बैंकों के कानून और नियम कमेटी के एजेंडे में साफ शामिल हैं। भविष्य में अगर कोई सुझाव आता है, तो उसे संबंधित RRB कानून, सर्विस रेगुलेशन और लागू आदेश के हिसाब से जांचना होगा।
- ब्रांच और क्रेडिट ऑफिसर: Priority Sector Lending और Lead Bank Scheme की समीक्षा हो सकती है। फिलहाल लागू कामकाजी जिम्मेदारियां पुरानी वैध व्यवस्था के अनुसार ही रहेंगी।
- ऑपरेशंस, टेक्नोलॉजी और फ्रॉड टीम: AI, साइबर सुरक्षा, टैलेंट और स्टाफ ट्रेनिंग पर सिफारिशें मांगी गई हैं; कमेटी बनने से कोई नया बैंक-व्यापी तकनीकी नियम लागू नहीं हुआ है।
- अन्य कर्मचारी और यूनियन: असली कमेटी रिपोर्ट, सरकारी फैसला, संशोधित नियम और इम्प्लीमेंटेशन आदेश अलग-अलग चरण हैं। इन्हें एक ही मानकर सोशल मीडिया पर खबर शेयर न करें।
क्या तय है और क्या अभी बाकी है?
तय बातें: कमेटी बन चुकी है, अध्यक्ष और सदस्य घोषित हैं, छह महीने का कार्यकाल तथा समीक्षा के विषय सामने हैं। बाकी बातें: कमेटी क्या सिफारिश देगी, सरकार क्या स्वीकार करेगी, किस कानून या नियम में बदलाव होगा, और किन कर्मचारियों पर वास्तविक असर होगा। जांचे गए स्रोतों में न तो कमेटी की अंतिम रिपोर्ट है और न कोई नया कर्मचारी सर्विस सर्कुलर।
आगे अगर AIBEA या दूसरी यूनियन अलग ज्ञापन देती है, कमेटी रिपोर्ट जारी करती है या सरकार कोई वास्तविक आदेश लाती है, तो वह नई पुष्टि के बाद अलग खबर होगी। अभी संभावित भविष्य की चर्चा को लागू नीति की तरह पेश करना सही नहीं होगा।
स्रोत और संदर्भ
- Ministry of Finance / Press Information Bureau — The Government of India Constitutes the High Level Committee on Banking for Viksit Bharat. https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2330598&lang=1®=3
- All India Bank Employees Association — AIBEA Circular No. 46.79 Dated 31st Oct 2026. https://aibea.in/aibea-circular-no-46-79-dated-31st-oct-2026/
- Business Standard — Former CVC Suresh N Patel to lead high-level banking reforms committee. https://www.business-standard.com/industry/banking/finmin-sets-up-high-level-panel-to-review-banking-sector-suggest-reforms-126103001851_1.html
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