हैदराबाद के एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर और उनकी पत्नी ने सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर फोन करने वालों से लगभग ₹1.52 करोड़ की ठगी होने की शिकायत की है। यह खबर 31 अक्टूबर 2026 को सामने आई थी। जांच में रकम वापसी या गिरफ्तारी की अंतिम स्थिति की पुष्टि नहीं मिली है।

स्थितिNot Applicable

घटना के बारे में क्या रिपोर्ट हुआ?

The New Indian Express ने 31 अक्टूबर को बताया कि हैदराबाद में 80 वर्षीय रिटायर्ड बैंक मैनेजर और उनकी पत्नी ने करीब ₹1.52 करोड़ की कथित साइबर ठगी की शिकायत की। अपराधियों के इस तरीके को आम बोलचाल में “डिजिटल अरेस्ट” कहा जाता है, जबकि कानून में ऐसी किसी ऑनलाइन हिरासत की प्रक्रिया को इस तरह मान्यता नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार 19 अक्टूबर से संपर्क शुरू हुआ। फोन करने वाले लोग पहचान दस्तावेजों से जुड़े झूठे आरोप लगाकर खुद को पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों से जुड़े अधिकारी बताते रहे। कथित तौर पर नकली सरकारी कागजों और धमकियों से दबाव बनाया गया। परिवार का पता या दूसरे निजी विवरण यहां देना जरूरी नहीं है।

पैसे ट्रांसफर और शिकायत की जानकारी

समाचार के मुताबिक पैसे को आधिकारिक जांच में सत्यापन की रकम बताकर बैंकिंग चैनल के जरिए ट्रांसफर कराने को कहा गया। बाद में परिजन से बात करने पर दंपती को कथित धोखाधड़ी का एहसास हुआ और उन्होंने लगभग 28 अक्टूबर के आसपास पुलिस से संपर्क किया।

The Times of India ने भी इस मामले पर रिपोर्ट प्रकाशित की। उपलब्ध खबरों में शिकायत और कथित नुकसान की रकम का उल्लेख मिलता है। लेकिन मूल केस डायरी, अंतिम अदालत का फैसला, किसी आरोपी की दोषसिद्धि या पूरी रकम वापस मिलने का स्वतंत्र प्रमाण इन रिपोर्टों से नहीं मिलता।

यह बैंक कर्मचारियों से जुड़ी खबर क्यों है?

इस घटना में एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सीधे प्रभावित हुआ है। इसलिए मामला बैंकिंग समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, भले ही कथित अपराध नौकरी से रिटायर होने के बाद और बैंक के बाहर हुआ हो।

किसी रिपोर्ट में उनके पूर्व बैंक को इस ठगी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। गिरफ्तारी, पैसा फ्रीज होने या रिफंड का पुष्ट अपडेट भी उपलब्ध नहीं है। बिना जानकारी के किसी पक्ष पर लापरवाही या अपराध का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।

अब क्या जानकारी मिलना बाकी है?

पुलिस की आगे की जांच से आरोपियों, पैसे भेजे गए खातों और संभावित रिकवरी की स्थिति साफ हो सकती है। तब तक नुकसान की रकम शिकायत और समाचार रिपोर्ट के आधार पर ही बताई जानी चाहिए।

ऐसी ठगी में तुरंत अपने बैंक को संदिग्ध ट्रांजैक्शन की सूचना देना और सरकारी साइबर अपराध रिपोर्टिंग सुविधा से संपर्क करना उपयोगी सामान्य कदम है। यह कहना सही नहीं होगा कि इस मामले में ये सभी कदम लिए गए थे।

स्रोत और संदर्भ

इस रिपोर्ट के बारे में
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