SBI की व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी याचिका पर NCLT मुंबई बेंच ने 5 नवंबर 2026 को Videocon के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के खिलाफ दिवालियापन का आदेश दिया, ऐसी खबर है। ₹12,668.06 करोड़ दावा की गई बकाया रकम है, बैंक को हुई वसूली नहीं।

स्थितिNot Applicable

NCLT के फैसले में क्या नया है

5 नवंबर 2026 को राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) की मुंबई बेंच ने Videocon Industries के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत के खिलाफ दिवालियापन का आदेश दिया। Moneycontrol और The Indian Express ने 6 नवंबर को बताया कि यह कार्रवाई State Bank of India (SBI) की याचिका पर हुई। मामला कॉरपोरेट लोन के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है। इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि SBI को दावा की गई पूरी रकम वापस मिल गई है।

Moneycontrol के मुताबिक, अधिकरण ने Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 की धारा 123 और 126 के तहत याचिका को आवश्यक शर्तों के अनुरूप माना। रिपोर्ट के अनुसार, असीष नारायण को दिवालियापन ट्रस्टी नियुक्त किया गया और संपत्ति के प्रबंधन तथा लेनदारों के बीच वितरण की प्रक्रिया उनके जिम्मे रखी गई। इस रिपोर्ट के लिए NCLT के हस्ताक्षरित मूल आदेश की स्वतंत्र जांच नहीं हो सकी है। इसलिए प्रक्रिया से जुड़े विवरण प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर बताए जा रहे हैं।

₹12,668.06 करोड़ का दावा और ₹600 करोड़ का प्रस्ताव

रिपोर्ट के अनुसार SBI ने 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और पेनल्टी समेत ₹12,668.06 करोड़ का दावा बताया। यह दावा की गई बकाया रकम है, बैंक को मिल चुकी वसूली नहीं। वास्तव में कितनी रकम मिल पाएगी, यह संपत्तियों की उपलब्धता, स्वीकार किए गए दावों, प्रक्रिया के खर्च और आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

इससे पहले 36 महीने में ₹600 करोड़ चुकाने की योजना सामने आई थी। प्रस्तावित भुगतान का आधार सिलीगुड़ी में एक रियल-एस्टेट प्रोजेक्ट से संभावित आय था। रिपोर्टों के मुताबिक भविष्य की मंजूरियों और कैश फ्लो को लेकर अनिश्चितता थी। लेनदारों ने योजना स्वीकार नहीं की। इसलिए ₹600 करोड़ को स्वीकृत सेटलमेंट या की गई रिकवरी नहीं समझना चाहिए।

व्यक्तिगत गारंटी का पुराना संदर्भ

यह मामला 2010 से 2012 के बीच Videocon Industries और Videocon Telecommunications को दी गई क्रेडिट सुविधाओं से संबंधित व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है। इनमें SBI और उसके पूर्व एसोसिएट बैंकों की सुविधाएं शामिल थीं। एसोसिएट बैंक बाद में SBI में मिल गए। कंपनी की अपनी insolvency प्रक्रिया और गारंटर के खिलाफ व्यक्तिगत कार्रवाई अलग कानूनी पहलू हैं।

Moneycontrol के अनुसार अप्रैल 2026 में व्यक्तिगत insolvency प्रक्रिया शुरू हुई थी, जुलाई में पुनर्भुगतान योजना अस्वीकार हुई और उसके बाद SBI ने दिवालियापन संबंधी आदेश मांगा। नया रिपोर्ट किया गया आदेश 5 नवंबर 2026 का है।

क्रेडिट और रिकवरी टीम के लिए क्यों महत्वपूर्ण

  • पर्सनल गारंटी देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई, कॉरपोरेट कर्जदार की अपनी जिम्मेदारी से अलग हो सकती है।
  • याचिका में दर्ज दावा और बैंक के खाते में आई वास्तविक वसूली को हमेशा अलग रखना जरूरी है।
  • गारंटी दस्तावेज, गारंटी लागू करने के नोटिस और लेनदार के दावे लंबे रिकवरी मामलों में अहम होते हैं।
  • ट्रस्टी की नियुक्ति के बाद भी संपत्तियों की जांच, दावों का मिलान और वितरण बाकी हो सकता है; रिकवरी का प्रतिशत पहले से तय नहीं मान सकते।

अभी क्या पुष्टि हुई है और क्या नहीं

उपलब्ध रिपोर्टें दिवालियापन का आदेश और ट्रस्टी की नियुक्ति बताती हैं। किसी निश्चित अंतिम रिकवरी, भुगतान की तारीख या अलग-अलग बैंकों को मिलने वाली रकम की पुष्टि नहीं हुई है। NCLT का प्रमाणित आदेश और ट्रस्टी की विस्तृत रिपोर्ट स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं हो सकी। बाद में अपील, स्थगन, सुधार या वास्तविक भुगतान की खबर आए तो उसकी आधिकारिक पुष्टि अलग से करनी होगी।

स्रोत और संदर्भ

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