गुजरात ग्रामीण बैंक के कुछ कर्मचारियों ने नवंबर में एक साथ चल रहे कैंपेन, कथित स्टाफ की कमी और ऑफिस समय के बाद मीटिंग को लेकर शिकायतें बताई हैं। ये बयान 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित हुए थे; बैंक के मूल निर्देश और प्रबंधन के पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कर्मचारियों ने क्या शिकायतें बताईं?
गुजरात ग्रामीण बैंक के कुछ कर्मचारियों ने अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए The Kanal से शाखाओं में बढ़ते काम के दबाव की शिकायत की। यह रिपोर्ट 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित हुई थी। कर्मचारियों का कहना था कि दिवाली के आसपास कई बिजनेस कैंपेन, रोजमर्रा की बैंकिंग जिम्मेदारियां और मीटिंग एक साथ चलने से काम संभालना मुश्किल हो रहा है। यह प्रकाशित कर्मचारी-पक्ष है; इसे किसी स्वतंत्र जांच या बैंक के प्रमाणित सर्कुलर का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ शाखाओं में नई भर्ती के बावजूद स्टाफ की कमी होने की शिकायत है। कर्मचारियों ने छुट्टी से जुड़े मामलों, कुछ भत्तों के भुगतान में देरी और शाखाओं पर पड़ रहे अतिरिक्त काम का भी जिक्र किया। Branch Wale को ऐसा प्रमाणित स्टाफ-पोस्टिंग रिकॉर्ड, छुट्टी अस्वीकृति आदेश या भुगतान विवरण नहीं मिला जिससे पता चले कि ये स्थितियां कितनी शाखाओं में हैं।
कौन-कौन से काम एक साथ चलने की बात कही गई?
रिपोर्ट में कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर कई कैंपेन बताए गए हैं। कार लोन कैंपेन की अवधि 29 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 और किसान क्रेडिट कार्ड सैचुरेशन कैंपेन की अवधि 2 से 25 नवंबर बताई गई। इसके अलावा खराब ऋण खातों को घटाने से जुड़े प्रयास, बीमा नामांकन और गुजरात आरआरबी के बीमा संबंधी अभियान का भी उल्लेख है। इन तारीखों और कैंपेन के विवरण की पुष्टि बैंक के मूल निर्देशों से स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि कैंपेन के साथ नॉमिनेशन, दोबारा केवाईसी, सेंट्रल केवाईसी, सेविंग अकाउंट खोलने और सरकारी बीमा व पेंशन योजनाओं का नामांकन जैसे रोज के काम भी करने पड़ते हैं। ये सभी सामान्य बैंकिंग कार्य हैं। शिकायत काम के अस्तित्व पर नहीं, बल्कि एक साथ दिए जा रहे कथित टारगेट, समय-सीमा और उपलब्ध स्टाफ पर है। पूरे बैंक में लागू कोई प्रमाणित टारगेट शीट इस समीक्षा में उपलब्ध नहीं थी।
ऑफिस के बाद मीटिंग और छुट्टी को लेकर सवाल
कुछ कर्मचारियों ने मीडिया संस्थान को बताया कि लक्ष्य पूरे न होने पर सामान्य ऑफिस समय के बाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंस बुलाई जाती है; एक उदाहरण में करीब शाम 7 बजे का समय बताया गया। उन्होंने दिवाली के आसपास लंबी छुट्टी लेने के अनुरोध हतोत्साहित किए जाने की बात भी कही। लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट से यह साबित नहीं होता कि बैंक ने आधिकारिक रूप से सभी कर्मचारियों के कार्य घंटे बढ़ा दिए हैं या सभी छुट्टियों पर रोक लगाई है।
इस मामले में बैंक प्रबंधन का प्रमाणित और विशिष्ट जवाब उपलब्ध स्रोत में नहीं मिला। इसलिए कर्मचारियों की शिकायतों को साबित तथ्य या प्रबंधन द्वारा स्वीकार की गई बात बताना सही नहीं होगा। खबर देने वाले कर्मचारियों की पहचान गोपनीय रखी गई है और यहां उनके निजी विवरण नहीं दिए गए हैं।
ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों के लिए इसका महत्व
ग्रामीण बैंक की शाखाओं में लोन, वसूली, सरकारी योजनाओं में नामांकन और ग्राहक दस्तावेजों का काम अक्सर एक साथ होता है। ऐसे में काम के दबाव पर उठे सवाल स्टाफ की उपलब्धता, काम के बंटवारे और कर्मचारियों की भलाई के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। हालांकि केवल प्रकाशित शिकायत से किसी नियम का उल्लंघन या बैंक संचालन में विफलता साबित नहीं होती। सही स्थिति जानने के लिए संबंधित कैंपेन निर्देश, शाखावार स्टाफ संख्या, लागू छुट्टी नियम, मीटिंग का रिकॉर्ड और प्रबंधन का पक्ष जरूरी होगा।
कर्मचारियों को अपने बैंक के वास्तविक सेवा नियम, लिखित निर्देश और मान्य शिकायत निवारण प्रक्रिया के आधार पर कदम उठाना चाहिए। इस रिपोर्ट से कोई नया भत्ता, छुट्टी का अधिकार, कार्य-समय का नियम या अनुशासनात्मक आदेश लागू होने की पुष्टि नहीं होती।
किन बातों की पुष्टि अभी बाकी है?
- क्या बताए गए सभी कैंपेन हर शाखा में एक साथ चल रहे थे या कुछ क्षेत्रों तक सीमित थे?
- कितने कर्मचारी प्रभावित हैं और संबंधित शाखाओं में वास्तव में कितना स्टाफ उपलब्ध है?
- ऑफिस के बाद मीटिंग और छुट्टी संबंधी शिकायतें किसी लिखित आदेश पर आधारित थीं या अलग-अलग घटनाएं थीं?
- इन आरोपों पर बैंक प्रबंधन, स्पॉन्सर बैंक या नियामक ने क्या प्रतिक्रिया दी?
यह 4 नवंबर को प्रकाशित कर्मचारी शिकायतों की बाद में मिली खबर है। इसका अर्थ यह नहीं कि 7 नवंबर को कोई नई जांच, कार्रवाई या आधिकारिक फैसला हुआ है। विश्वसनीय नए दस्तावेज या प्रबंधन की प्रतिक्रिया मिलने पर ही मामले में कोई महत्वपूर्ण नया अपडेट माना जाएगा।
स्रोत और संदर्भ
- The Kanal — “Working Under Pressure, Even Diwali Comes Without Happiness” Gujarat Gramin Bank Employees Allege Excessive Targets and Mental Stress (प्रकाशन: 4 नवंबर 2026; गुमनाम कर्मचारियों के बयान)।
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