उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था शुरू किए जाने की खबर सामने आई है। 6 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने अधिकारियों को संशोधित केंद्रीय नियमों के तहत पर्याप्त प्रगणक उपलब्ध कराने को कहा है। इन नियमों में बैंक के क्लर्क और अधिकारी भी पात्र श्रेणी में हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बैंकर की ड्यूटी लग गई है। किसी बैंक या कर्मचारी का विशेष नियुक्ति आदेश अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।

उत्तर प्रदेश से नया अपडेट क्या है?

उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू किए जाने की खबर है। दैनिक जागरण की राज्य ब्यूरो रिपोर्ट, जो 6 नवंबर 2026 को सुबह 5:30 बजे प्रकाशित हुई, के मुताबिक प्रमुख सचिव एस.वी.एस. रंगा राव ने मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को संशोधित नियमों के अनुसार जनगणना कर्मियों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। यह राज्य स्तर पर तैयारी का नया घटनाक्रम है। इसे 6 नवंबर को जारी किसी नए केंद्रीय संशोधन के तौर पर नहीं पढ़ना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक पात्र कर्मचारियों का दायरा बढ़ा है। इसमें सरकारी और कुछ निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, केंद्र और राज्य सरकार के अलग-अलग कार्यालयों के कर्मचारी, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक उपक्रम, बैंक, कंपनियां और दूसरे संस्थानों के क्लर्क तथा अधिकारी शामिल हो सकते हैं। पात्र होना और वास्तव में ड्यूटी पर नियुक्त हो जाना दो अलग बातें हैं।

केंद्रीय जनगणना नियम कब बदले थे?

गृह मंत्रालय ने जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना अक्टूबर 2026 में जारी की थी। सरकारी प्रसारक आकाशवाणी के News on AIR ने 16 अक्टूबर 2026 को इस बदलाव की जानकारी दी थी। उसके अनुसार संभावित प्रगणकों की सूची में शिक्षकों के साथ विभिन्न संस्थानों के क्लर्क और अधिकारियों को भी शामिल किया गया। बैंकों में काम करने वाले कर्मचारी इस विस्तारित पात्रता दायरे का हिस्सा हैं।

यहां दो तारीखें अलग-अलग समझना जरूरी है। अक्टूबर का केंद्र सरकार का संशोधन बताता है कि किन श्रेणियों से प्रगणक नियुक्त किए जा सकते हैं। नवंबर की उत्तर प्रदेश वाली खबर बताती है कि राज्य स्तर पर अधिकारियों से इन नियमों के हिसाब से स्टाफ की व्यवस्था करने को कहा गया है। दूसरे राज्यों ने क्या आदेश दिए हैं, उसे अलग से सत्यापित करना होगा।

क्या अब सभी बैंक कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी पक्की है?

नहीं। उपलब्ध खबर और पुराने केंद्रीय नियमों से ऐसा निष्कर्ष नहीं निकलता। किसी बैंक के सभी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने का आदेश, किसी शाखा की नामवार सूची, या किसी विशेष अधिकारी का नियुक्ति पत्र इन स्रोतों में नहीं है। किस कर्मचारी को भेजा जाएगा, किस अवधि के लिए भेजा जाएगा और उसके बैंक के सामान्य काम पर क्या व्यवस्था होगी, यह आगे जारी होने वाले आधिकारिक निर्देशों पर निर्भर करेगा।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव के मूल पत्र की प्रति इस सत्यापन में स्वतंत्र रूप से नहीं मिली। इसलिए पत्र में दिए गए निर्देशों का विवरण दैनिक जागरण की रिपोर्ट के आधार पर बताया जा रहा है। इसे सीधे पढ़े गए सरकारी आदेश या बैंक के आंतरिक सर्कुलर के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

बैंक शाखाओं के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण क्यों है?

किसी शाखा से कर्मचारी की तैनाती होने पर ग्राहक सेवा, नकद भुगतान, खाता खोलने, लोन प्रोसेसिंग, केवाईसी और रोजमर्रा की अनुपालन जिम्मेदारियों के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। लेकिन ऐसा असर तभी निश्चित कहा जा सकता है जब संबंधित बैंक और शाखा में वास्तविक तैनाती का आदेश आए। केवल पात्रता की खबर के आधार पर स्टाफ की कमी या बैंकिंग सेवाओं में बाधा का दावा करना उचित नहीं होगा।

इससे अलग, 5 नवंबर को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की ओर से इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को जनगणना कार्य में बैंक कर्मचारियों की तैनाती का विरोध करने के लिए पत्र लिखे जाने की खबर आई थी। यूनियन का तर्क स्टाफ की कमी और काम के दबाव से जुड़ा बताया गया। वह यूनियन की मांग है, सरकार द्वारा मंजूर की गई छूट नहीं। इस नए लेख का केंद्र 6 नवंबर को सामने आया उत्तर प्रदेश का प्रशासनिक कदम है।

बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को किन बातों की जांच करनी चाहिए?

  • क्या जिले के सक्षम अधिकारी ने बैंक या किसी कर्मचारी के नाम से लिखित ड्यूटी आदेश जारी किया है?
  • क्या बैंक ने कर्मचारियों के नामांकन, ड्यूटी अवधि, उपस्थिति, छुट्टी या शाखा संचालन को लेकर कोई आधिकारिक निर्देश दिया है?
  • क्या केवल खबर में संभावित तैनाती बताई गई है, या संबंधित कर्मचारी को विधिवत नियुक्त किया जा चुका है?
  • सरकार, IBA और कर्मचारी संगठनों की अगली जानकारी में मांग, सुझाव और बाध्यकारी आदेश को अलग-अलग समझें।

अभी किन बातों की पुष्टि बाकी है?

उत्तर प्रदेश शासन के मूल निर्देश की प्रति, किसी खास बैंक की नामवार सूची, जनगणना में लगने वाले बैंकरों की कुल संख्या, जिलेवार ड्यूटी कार्यक्रम और व्यक्तिगत नियुक्ति आदेश स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं। अभी पुष्टि योग्य बात यह है कि रिपोर्ट में राज्य द्वारा स्टाफ की व्यवस्था शुरू करने के निर्देश बताए गए हैं और केंद्रीय नियम पहले से बैंक कर्मचारियों को संभावित प्रगणक की श्रेणी में रखते हैं। आगे कोई नया आदेश आता है तो स्थिति बदल सकती है।

स्रोत और संदर्भ

इस रिपोर्ट के बारे में
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