बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक 5 नवंबर 2026 को बैंक मैनेजमेंट के साथ उसकी पहली IR बैठक हुई। ट्रांसफर, CAIIB, स्टाफ लोन, कर्मचारियों की कमी और ब्रांच IT समेत 11 मुद्दे उठाए गए। किसी मांग की औपचारिक मंजूरी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

किसके लिएBank of India officersस्थितिDemanded

बैंक ऑफ इंडिया मैनेजमेंट के साथ ऑफिसर्स संगठन की पहली IR बैठक की खबर

बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स ऑर्गेनाइजेशन (BOIOO) ने बताया है कि 5 नवंबर 2026 को उसकी बैंक ऑफ इंडिया मैनेजमेंट के साथ पहली औपचारिक इंडस्ट्रियल रिलेशंस (IR) बैठक हुई। The Kanal की रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत करीब ढाई घंटे चली। रिपोर्ट में संगठन की जानकारी और उसके नेशनल जनरल सेक्रेटरी डॉ. रामावतार सैनी की प्रतिक्रिया शामिल है। यह कर्मचारियों के मुद्दों पर हुई बैठक की खबर है, किसी नए भत्ते या सुविधा के लागू होने की घोषणा नहीं।

संगठन ने मैनेजमेंट के रवैये को सकारात्मक और बातचीत के माहौल को सहयोगपूर्ण बताया है। यह संगठन का आकलन है। जांचे गए स्रोतों में बैंक की ओर से जारी संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित मिनट्स, औपचारिक समझौता या किसी मांग की मंजूरी का आदेश नहीं मिला।

बैठक में उठाए गए 11 प्रमुख मुद्दे

संगठन ने ट्रांसफर, अधिकारियों के अधिकार, प्रोफेशनल योग्यता, स्टाफ लोन, बच्चों की पढ़ाई, टैक्स, कर्मचारियों की कमी और ब्रांच की तकनीकी परेशानियों को लेकर कई मांगें रखीं। इनमें कुछ मौजूदा नियमों को समान ढंग से लागू करने की मांग हैं और कुछ बदलाव के प्रस्ताव हैं।

ट्रांसफर, योग्यता और कर्मचारियों के अधिकार

  • ट्रांसफर पॉलिसी: संगठन ने मौजूदा प्रावधानों को एक समान लागू करने और यूनियन पदाधिकारियों के साथ कथित प्रतिकूल व्यवहार रोकने की मांग रखी।
  • उच्च शिक्षा की योग्यता: बैंक जॉइन करने से पहले हासिल मान्य पोस्टग्रेजुएट या प्रोफेशनल योग्यताओं को लागू सर्कुलर के अनुसार उचित वेटेज देने की बात उठाई गई।
  • स्पेशलिस्ट ऑफिसर और CAIIB: Certified Associate of the Indian Institute of Bankers (CAIIB) से जुड़ी अनिवार्यता पर पात्र स्पेशलिस्ट ऑफिसर्स को एक बार राहत देने का अनुरोध किया गया।
  • प्रशासनिक व्यवहार: संगठन ने पदाधिकारियों को कथित मनमाने मेमो, लीव में दिक्कत और प्रशासनिक दबाव की शिकायत की। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या न्यायिक जांच का निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।

स्टाफ लोन और परिवार से जुड़ी सुविधाएं

  • स्टाफ लोन की प्रोसेसिंग: लोन की फाइलें कम मैनुअल स्टेप में निपटाने के लिए Straight-Through Processing (STP) व्यवस्था की मांग की गई।
  • पति-पत्नी दोनों बैंक कर्मचारी हों तो लोन दर: ऐसे जॉइंट स्टाफ लोन में ब्याज दरों के कथित अंतर को ठीक करने की मांग रखी गई।
  • कर्मचारियों के बच्चों का एजुकेशन लोन: स्टाफ के बच्चों के लिए एजुकेशन लोन की ब्याज दरों की समीक्षा और बेहतर शर्तें देने का अनुरोध किया गया।
  • आवास और टैक्स: सब्सिडी वाली रिहायशी सुविधा पर पर्क्विजिट टैक्स के व्यवहार तथा संगठन के अनुसार बन रहे दोहरे टैक्स प्रभाव की समीक्षा मांगी गई।

मैनपावर, IT सुविधा और बाकी विषय

  • मैनपावर: ब्रांच और ऑफिस में पर्याप्त स्टाफ, छुट्टी या आपात स्थिति में रिलीवर की व्यवस्था तथा स्पेशलिस्ट ऑफिसर्स की उचित पोस्टिंग की मांग रखी गई।
  • टेक्नोलॉजी: ब्रांच के कंप्यूटर, नेटवर्क, हार्डवेयर बदलने की समय-सीमा और वेंडर की सर्विस सुधारने पर जोर दिया गया।
  • अन्य मुद्दे: करियर प्रोग्रेशन, ब्रांच हेड को आधिकारिक फोन और SIM, विभिन्न सुविधाओं की सीमाओं में बदलाव और ट्रांसफर खर्च घटाने के लिए क्षेत्र-आधारित भर्ती का सुझाव दिया गया।

किस बात पर फैसला हुआ और क्या अभी सिर्फ मांग है?

इस खबर की पक्की बात यह है कि संगठन ने बैठक होने और मुद्दे उठाए जाने की जानकारी दी है। लेकिन 11 मुद्दों पर चर्चा का मतलब यह नहीं कि नई ट्रांसफर पॉलिसी, CAIIB में छूट, सस्ता स्टाफ लोन, टैक्स में बदलाव या अतिरिक्त भर्ती मंजूर हो गई है। उपलब्ध रिपोर्ट में किसी मांग को स्वीकार करने वाला बैंक सर्कुलर, लागू होने की तारीख या पूरा लिखित समझौता नहीं मिलता। कर्मचारी लाभ के बारे में फैसला करने से पहले बैंक के प्रमाणित आदेश और अपनी पात्रता जरूर देखें।

डॉ. सैनी के अनुसार इस तरह की बातचीत से विभिन्न कर्मचारी संगठनों को अपनी समस्याएं रखने का मौका मिलता है। यह उनका पक्ष है। इससे अपने-आप यह साबित नहीं होता कि किसी संगठन को कोई नया कानूनी मान्यता-अधिकार या विशेष बातचीत का अधिकार मिल गया है।

IR बैठकों से जुड़ी पिछली पृष्ठभूमि

The Kanal की 31 जुलाई 2026 की एक अलग रिपोर्ट में बताया गया था कि NOBO और National Organisation of Bank Workers ने Department of Financial Services (DFS) के 30 जुलाई के पत्र के संदर्भ में मान्यता प्राप्त संगठनों के साथ नियमित, व्यवस्थित IR बैठकों का मुद्दा उठाया था। इससे नई बैठक की पृष्ठभूमि समझ में आती है। इस समीक्षा में मूल DFS पत्र और बैंक के अंदर उस पर हुई कार्रवाई के दस्तावेज स्वतंत्र रूप से नहीं देखे गए हैं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि इस बैठक के लिए किसी नए सत्यापित आदेश ने बाध्य किया था या सभी सरकारी बैंकों में एक जैसी व्यवस्था लागू है।

बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के लिए क्या मायने हैं?

अधिकारियों के लिए अहम बात यह है कि ट्रांसफर, मैनपावर, प्रोफेशनल योग्यता, स्टाफ लोन और ब्रांच IT जैसी अलग-अलग समस्याएं मैनेजमेंट के सामने एक साथ रखी गई हैं। अब असली बदलाव तभी माना जाएगा जब बैंक की ओर से प्रमाणित मिनट्स, लिखित जवाब, नया सर्कुलर या अगली बैठक में ठोस फैसला सामने आए। इन स्रोतों के आधार पर अभी किसी लाभ या नियम में बदलाव की पुष्टि नहीं होती।

अभी क्या-क्या साफ नहीं है?

जांची गई रिपोर्ट में बैठक की पूरी हस्ताक्षरित कार्यवाही, सभी उपस्थित अधिकारियों की सूची, हर मांग पर मैनेजमेंट का लिखित जवाब और किसी मांग की मंजूरी का सबूत नहीं मिलता। पदाधिकारियों के साथ कथित प्रतिकूल व्यवहार के आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई। आगे कोई नया और प्रमाणित फैसला आता है, तो उसे इस प्रतिनिधित्व से अलग स्पष्ट रूप में बताना जरूरी होगा।

स्रोत और संदर्भ

इस रिपोर्ट के बारे में
स्रोत देखें, लागू होने की स्थिति जांचें और किसी गलती की जानकारी हमें दें।