मुंबई की विशेष CBI अदालत ने 2 नवंबर 2026 को बैंक भर्ती परीक्षाओं में कथित दूसरे व्यक्ति से परीक्षा दिलवाने के मामले में दो आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कीं। रिपोर्टों के अनुसार जांच में IBPS प्रक्रियाओं के 135 अभ्यर्थियों और कथित इम्पर्सनेशन से जुड़े लोगों की भूमिका देखी जा रही है। जमानत खारिज होना किसी अभ्यर्थी या बैंक कर्मचारी के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है।

अदालत में नया क्या हुआ?

मुंबई से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार विशेष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अदालत ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को एक कार्यरत केंद्रीय GST इंस्पेक्टर और एक लॉ स्टूडेंट की जमानत अर्जियां खारिज कीं। दोनों बैंकिंग भर्ती के लिए Institute of Banking Personnel Selection (IBPS) की परीक्षाओं में कथित तौर पर दूसरे लोगों से परीक्षा दिलवाने से जुड़े बड़े मामले में आरोपी हैं। इस चरण पर जमानत न मिलना अदालत का अंतिम ट्रायल फैसला नहीं है।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने जांच एजेंसी के हवाले से खबर दी कि अलग-अलग परीक्षाओं में 135 अभ्यर्थियों की जगह 46 कथित इम्पर्सनेटर बैठने की बात जांच में सामने आई है। अभियोजन पक्ष ने PSB और RRB की नौकरियों से जुड़े आरोप बताए तथा बायोमेट्रिक और परीक्षा रिकॉर्ड पर भरोसा जताया। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं; किसी अदालत ने अभी हर एक अभ्यर्थी को दोषी ठहराने का अंतिम निर्णय नहीं दिया है।

दोनों पक्षों की दलील और आदेश की सीमा

रिपोर्ट के मुताबिक बचाव पक्ष ने सहयोग करने की बात रखी, गिरफ्तारी के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाए और एक जैसे आरोपों पर बार-बार केस दर्ज करने का तर्क दिया। अभियोजन ने कहा कि कथित नेटवर्क की जांच बड़े स्तर पर चल रही है। अदालत ने आरोपों की गंभीरता और चल रही जांच जैसे पहलुओं को देखते हुए इस समय जमानत देने से इनकार किया।

इस रिपोर्ट के लिए अदालत के मूल हस्ताक्षरित आदेश और पूरे केस रिकॉर्ड को स्वतंत्र रूप से पढ़ना संभव नहीं हुआ। इसलिए यह लेख जज के सभी कारणों को शब्दशः बताने या अखबार की खबर से आगे कोई फैसला घोषित करने का दावा नहीं करता। जमानत खारिज होना दोषसिद्धि नहीं है। FIR या जांच के आंकड़ों से हर संदिग्ध या नियुक्त कर्मचारी का दोष भी सिद्ध नहीं होता।

बैंक कर्मचारियों के लिए खबर का महत्व

बैंक में निष्पक्ष भर्ती की विश्वसनीयता सीधे कर्मचारियों और पूरे बैंकिंग समुदाय से जुड़ी बात है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने 31 अक्टूबर को इसी चल रहे मामले में CBI द्वारा कुछ गंभीर कानूनी धाराएं जोड़ने की खबर दी थी। वह पहले का प्रक्रियागत कदम है, जबकि इस लेख का नया घटनाक्रम 2 नवंबर का जमानत आदेश है।

इन भर्ती वर्षों में चयनित हर बैंक कर्मचारी को आरोपी मानने का कोई आधार नहीं है। किसी खास कर्मचारी के खिलाफ सेवा संबंधी कार्रवाई के लिए अलग साक्ष्य और उचित कानूनी प्रक्रिया जरूरी होगी। जांच जारी है; आगे के आरोपपत्र, राहत या अंतिम न्यायिक फैसले को नई पुष्टि मिलने पर अलग से समझाना चाहिए।

स्रोत और संदर्भ

  1. CBI court denies bail to GST inspector, law student in bank exam impersonation racket — Hindustan Times (2026-11-03)
  2. CBI adds charges carrying life term in bank recruitment racket probe — The Times of India (2026-10-31)
इस रिपोर्ट के बारे में
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