ओडिशा हाई कोर्ट ने Odisha Grameen Bank को अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए एक योजना बनाने का निर्देश दिया है। बैंक को 28 अक्टूबर 2026 का आदेश मिलने के चार महीने के भीतर यह काम करना होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी अस्थायी कर्मचारियों की नौकरी उसी दिन से पक्की हो गई है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
ओडिशा हाई कोर्ट के जस्टिस बिराजा प्रसन्न सतपथी ने 28 अक्टूबर 2026 को चार संबंधित याचिकाओं पर एक साझा फैसला दिया। मामला Odisha Grameen Bank के अलग-अलग ब्रांचों में काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों का है। पुराने रिकॉर्ड में बैंक का नाम Odisha Gramya Bank भी मिलता है। मुख्य याचिका W.P.(C) No. 19736 of 2019 थी और इसके साथ 19730, 19734 तथा 19737 of 2019 पर भी सुनवाई हुई।
कोर्ट ने कहा है कि बैंक आदेश मिलने की तारीख से चार महीने के भीतर नियमितीकरण की योजना बनाए। इस योजना को बनाते समय Andhra Pradesh Grameena Vikas Bank की संबंधित योजना को आधार बनाया जाए। योजना तैयार होने के बाद याचिकाकर्ताओं को उनके मौजूदा या उसी तरह के पदों पर नियमित किया जाए और वरिष्ठता का ध्यान रखा जाए।
कोर्ट ने 27 मई 2019 का वह आदेश भी रद्द कर दिया, जिसके जरिए बैंक ने इन कर्मचारियों का दावा खारिज किया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि फैसले से उसी दिन सभी कर्मचारियों को परमानेंट नियुक्ति पत्र मिल जाना साबित नहीं होता। चार महीने भी खबर छपने की तारीख से नहीं, बल्कि बैंक को कोर्ट का आदेश मिलने से गिने जाएंगे।
केस किन कर्मचारियों का था?
याचिकाओं में ऐसे कर्मचारी शामिल थे जो अलग-अलग ब्रांचों में ड्राइवर, सफाई कर्मचारी, मैसेंजर, DTP ऑपरेटर, IT इलेक्ट्रिशियन और नेटवर्किंग/हार्डवेयर जैसे काम अस्थायी तौर पर कर रहे थे। The New Indian Express और The Times of India ने इस मामले को 20 कर्मचारियों से जुड़ा बताया है। यह संख्या समाचार रिपोर्टों से ली गई है। कोर्ट के साझा आदेश में चार याचिकाओं और उनके याचिकाकर्ताओं का जिक्र है, न कि बैंक के हर अस्थायी कर्मचारी को तुरंत नियमित करने का आदेश।
जो लोग इन याचिकाओं का हिस्सा नहीं थे, उनके लिए अपने-आप नौकरी पक्की होने का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। उनके मामले में सेवा रिकॉर्ड, लागू नियम और बैंक की आगे की कार्रवाई देखनी होगी।
विवाद इतने सालों से क्यों चल रहा था?
कर्मचारियों ने 2019 में नियमितीकरण का दावा खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। उन्होंने ग्रामीण बैंकों के सफाई कर्मचारियों और मैसेंजर से जुड़े 30 अप्रैल 1990 के National Industrial Tribunal के अवॉर्ड तथा दूसरे राज्यों के ग्रामीण बैंक कर्मचारियों के मामलों का सहारा लिया। उनका पक्ष था कि लंबे समय से नियमित प्रकृति का काम करने वालों की स्थिति पर वास्तविक काम और सेवा की निरंतरता के आधार पर विचार होना चाहिए।
बैंक का पक्ष अलग था। बैंक ने दलील दी कि कुछ कर्मचारियों ने केवल दो से पांच साल काम करने के बाद दावा किया, शुरुआती भर्ती तय प्रक्रिया के मुताबिक नहीं हुई और संबंधित पदों के लिए स्वीकृत रिक्तियां नहीं थीं। ये कोर्ट में बैंक की दलीलें थीं; इन्हें कोर्ट का अंतिम निष्कर्ष समझना गलत होगा।
ट्रिब्यूनल के पुराने अवॉर्ड और अलग-अलग राज्यों के ग्रामीण बैंकों से जुड़े फैसलों को देखने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के लिए नियमितीकरण की योजना बनाना जरूरी है। यानी आदेश का क्रम साफ है: पहले योजना तैयार हो, फिर उसके अनुसार नियमितीकरण आगे बढ़े।
ग्रामीण बैंक कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है?
- याचिकाकर्ताओं के लिए: बैंक को कोर्ट का आदेश मिलने के चार महीने में योजना तैयार करनी होगी। इसके बाद वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़नी है।
- दूसरे अस्थायी RRB कर्मचारियों के लिए: यह फैसला सेवा संबंधी मामलों में उपयोगी संदर्भ हो सकता है, लेकिन इससे दूसरे ग्रामीण बैंकों या सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को अपने-आप वही लाभ नहीं मिल जाते।
- HR विभाग और कर्मचारी संगठनों के लिए: अगली अहम जानकारी होगी—बैंक को आदेश कब मिला, योजना कब जारी हुई, क्या कोई अपील या स्टे आया और किस कर्मचारी के बारे में क्या फैसला हुआ।
अभी कौन-सी बातें स्पष्ट नहीं हैं?
उपलब्ध फैसले से हाई कोर्ट का निर्देश स्पष्ट है, लेकिन यह साबित नहीं होता कि बैंक ने योजना लागू कर दी है या स्थायी नियुक्ति आदेश जारी कर दिए हैं। किसी अपील पर अंतिम निर्णय भी इन स्रोतों से स्थापित नहीं हुआ। चार महीने की सही अंतिम तारीख बताने के लिए बैंक को आदेश प्राप्त होने की तारीख चाहिए। आगे बैंक की आधिकारिक कार्रवाई होने पर उसी के आधार पर नई खबर बनेगी।
स्रोत और संदर्भ
- Apurba Ranjan Mohanty & Others v Odisha Grameen Bank & Others — W.P.(C) Nos. 19736, 19730, 19734 and 19737 of 2019 — High Court of Orissa (judgment text reproduced by Indian Kanoon) (2026-10-28).
- HC directs Odisha Grameen Bank to frame scheme for staff regularisation within four months — The New Indian Express (2026-10-30).
- HC directs grameen bank to regularise 20 employees in 4 months — The Times of India (2026-10-29).
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