राजस्थान हाई कोर्ट के 5 अक्टूबर 2026 के आदेश के बाद SBI के दो पूर्व अधिकारियों के खिलाफ 29 अक्टूबर को ACB की FIR दर्ज होने की खबर सामने आई है। पुलिस की मूल FIR इस रिसर्च में सीधे नहीं मिल सकी, इसलिए नई जानकारी और शिकायत से जुड़े आरोप स्रोतों के हवाले से बताए गए हैं।

किसके लिएFormer SBI Chief Manager and former bank officials named in a reported ACB investigation

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद FIR दर्ज होने की रिपोर्ट

The Kanal की नई रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 29 अक्टूबर 2026 को State Bank of India के दो पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कथित रिश्वत मामले में FIR दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कार्रवाई राजस्थान हाई कोर्ट के 5 अक्टूबर के आदेश के बाद हुई। मामला SBI के एक पूर्व चीफ मैनेजर की शिकायत से जुड़ा है। उनका आरोप था कि विभागीय और सर्विस संबंधी मामलों में उनसे पैसे मांगे गए थे।

रिपोर्ट में पुलिस केस को FIR नंबर 306/2026 बताया गया है, जो जयपुर में ACB के संबंधित क्षेत्र में दर्ज हुआ। हाई कोर्ट मामले का विवरण S.B. Criminal Miscellaneous (Petition) No. 7343/2024, Vivek Sharma v State of Rajasthan दिया गया है। कोर्ट के फैसले के बाद FIR दर्ज होना इस खबर का महत्वपूर्ण नया अपडेट है। FIR दर्ज होना दोष सिद्ध होना नहीं है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा और क्या फैसला नहीं दिया?

LiveLaw और Law4u की स्वतंत्र कानूनी रिपोर्टों में बताया गया है कि राजस्थान हाई कोर्ट ने SBI अधिकारियों से जुड़े रिश्वत के आरोपों की ACB की शुरुआती जांच की समीक्षा की। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों को खारिज करते हुए FIR दर्ज करने और उचित जांच करने का निर्देश दिया। अदालत का सवाल था कि जब शिकायत से संज्ञेय अपराध की आशंका का आधार सामने आया, तब पूरी आपराधिक जांच क्यों नहीं हुई।

इस लेख के लिए कोर्ट के आदेश की प्रमाणित मूल कॉपी सीधे नहीं मिल सकी। इसलिए आदेश का विवरण पढ़ी गई कानूनी रिपोर्टों पर आधारित है; यह दावा नहीं किया जा रहा कि Branch Wale ने हस्ताक्षरित आदेश खुद देखा है। हाई कोर्ट ने किसी आरोपी को रिश्वत लेने का दोषी नहीं ठहराया और न ही शिकायत के सभी आरोप सही होने का अंतिम निर्णय दिया।

मामला पहले कैसे आगे बढ़ा?

पूर्व चीफ मैनेजर की शिकायत 2022 की है। उनका आरोप था कि अनुशासनात्मक या सर्विस मामलों के संबंध में बैंक के कुछ अधिकारियों ने पैसे की मांग की। रिपोर्टों में ₹40 लाख की कथित मांग का उल्लेख है। यह शिकायतकर्ता का आरोप है; किसी रकम का भुगतान या रिश्वत साबित होने का निष्कर्ष नहीं।

ACB ने पहले वेरिफिकेशन और प्रारंभिक जांच की थी। कानूनी रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने उस जांच के निष्कर्ष और मामले को बंद करने से जुड़ी सिफारिश को चुनौती दी। हाई कोर्ट के 5 अक्टूबर के निर्देश के बाद The Kanal ने बताया कि 29 अक्टूबर को दर्ज FIR में दो पूर्व अधिकारियों को आरोपी के रूप में नामित किया गया।

पूर्व अधिकारी ने SBI की विजिलेंस से क्या मांग की?

The Kanal के अनुसार, पूर्व चीफ मैनेजर ने SBI के Chief Vigilance Officer (CVO) को भी पत्र लिखकर अपनी बर्खास्तगी की समीक्षा, कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच और व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की है। ये शिकायतकर्ता की मांगें हैं। इनसे यह साबित नहीं होता कि बैंक ने उनकी बात मान ली, बर्खास्तगी रद्द कर दी या अन्य लोगों को ACB के मामले में आरोपी बना दिया गया।

सर्विस विवाद और ACB की आपराधिक जांच दो अलग प्रक्रियाएं हैं। आपराधिक जांच कथित अपराध के तथ्यों पर केंद्रित है, जबकि सर्विस विवाद नौकरी संबंधी फैसले पर। हाई कोर्ट के जांच कराने के निर्देश को पूर्व कर्मचारी की बहाली का आदेश नहीं समझना चाहिए।

किन बातों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई?

  • ACB की मूल FIR और अदालत के अक्टूबर वाले आदेश की प्रमाणित कॉपी सीधे उपलब्ध नहीं हुई। इसलिए FIR नंबर, तारीख और उसमें नामित लोगों का विवरण The Kanal की रिपोर्ट के आधार पर ही दिया गया है।
  • इस रिसर्च में कोई चार्जशीट, दोषसिद्धि, अंतिम फैसला या SBI की ओर से CVO को भेजे गए नए पत्र पर प्रमाणित जवाब नहीं मिला।
  • शिकायतकर्ता ने जिन अन्य अधिकारियों को लेकर सवाल उठाए, वह उनके आरोप हैं, स्थापित निष्कर्ष नहीं। इस लेख में अपुष्ट अतिरिक्त नाम प्रकाशित नहीं किए गए हैं।

SBI कर्मचारियों के लिए इसका क्या महत्व है?

इस मामले से एक जरूरी अंतर साफ होता है: सर्विस विवाद में लगा आरोप, शुरुआती जांच, FIR और कोर्ट से दोषसिद्धि अलग-अलग चरण हैं। व्यक्तिगत शिकायतों में बैंक कर्मचारियों को प्रमाणित अनुशासनात्मक आदेश, केस रिकॉर्ड और लागू सर्विस नियमों को देखना चाहिए। इस रिपोर्ट से SBI की अनुशासनात्मक पॉलिसी या सभी कर्मचारियों के कानूनी अधिकारों में कोई सामान्य बदलाव नहीं हुआ है।

आगे कोई प्रमाणित जांच अपडेट, कोर्ट आदेश, बैंक का आधिकारिक जवाब या अलग सर्विस केस में निर्णय आएगा, तभी स्थिति बदली हुई मानी जा सकती है। फिलहाल आरोप जांच के दायरे में हैं और कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

स्रोत और संदर्भ

  1. The Kanal — SBI Bribery Case: ACB Registers FIR Against Two Former Officials; Former Chief Manager Seeks Action Against More Officers, Questions Vigilance Response
  2. LiveLaw — Rajasthan High Court Weekly Round-Up: October 19 – October 25, 2026 (31 अक्टूबर 2026)
  3. Law4u — ACB Directed to Register FIR Over ₹40 Lakh Bribery Allegation Against SBI Officials (22 अक्टूबर 2026)
इस रिपोर्ट के बारे में
स्रोत देखें, लागू होने की स्थिति जांचें और किसी गलती की जानकारी हमें दें।