उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में 2 नवंबर 2026 को लोन रिकवरी से जुड़ी विजिट के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों से कथित मारपीट हुई। क्षेत्रीय खबरों के मुताबिक एक मुख्य प्रबंधक को चोट आई। अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की है और CCTV रिकॉर्डिंग उपकरण से जुड़े आरोप की भी जांच कर रही है।

किसके लिएBank of Baroda recovery-related officers

रिकवरी विजिट के दौरान क्या हुआ?

Dainik Jagran और Live Hindustan की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारी एक NPA लोन खाते की बकाया रकम पर बात करने के लिए सोमवार, 2 नवंबर को पीलीभीत में एक कारोबारी प्रतिष्ठान पहुंचे थे। वहां बातचीत विवाद में बदली और अधिकारियों से कथित तौर पर मारपीट हुई। बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय से जुड़े एक मुख्य प्रबंधक को चोट आने की खबर है।

यह घटना बैंक की शाखा के काउंटर पर नहीं, बल्कि काम के सिलसिले में शाखा से बाहर हुई बताई गई है। इसलिए बैंक कर्मचारियों की फील्ड ड्यूटी और सुरक्षा से इसका सीधा संबंध है।

FIR दर्ज; आरोपों की जांच बाकी

Dainik Jagran ने स्थानीय पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि बैंक अधिकारियों की शिकायत पर FIR दर्ज की गई और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। Live Hindustan ने भी केस दर्ज होने की खबर दी। FIR दर्ज होने का मतलब सिर्फ आरोपों की औपचारिक जांच शुरू होना है; इससे किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं होता।

अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि विवाद के बाद CCTV सिस्टम से जुड़ा DVR ले जाया गया। खबरों के अनुसार पुलिस इस बात की जांच कर रही थी। DVR वास्तव में किसने लिया, उसमें क्या रिकॉर्ड हुआ था और घटना का सही क्रम क्या था—इन सवालों पर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

फील्ड विजिट करने वाले बैंकर्स की सुरक्षा

लोन रिकवरी और फॉलो-अप के लिए बैंक अधिकारी कई बार शाखा से बाहर जाते हैं। ऐसे काम में किसी संभावित टकराव का जोखिम आंकना, लागू बैंक प्रक्रिया के अनुसार विजिट करना और धमकी या चोट की तुरंत लिखित रिपोर्ट देना महत्वपूर्ण है। यह सामान्य सुरक्षा से जुड़ी बात है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने किसी तय सुरक्षा नियम का उल्लंघन किया।

स्थानीय लीड बैंक मैनेजर ने चोट और शिकायत का उल्लेख किया तथा उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई। देखी गई रिपोर्टों में जांच का अंतिम नतीजा या अदालत का फैसला उपलब्ध नहीं है।

क्या अभी स्पष्ट नहीं है?

प्रकाशित रिपोर्टों के समय पुलिस जांच चल रही थी। कथित हमलावर की कानूनी जिम्मेदारी, बहस और मारपीट का पूरा क्रम, DVR से जुड़ी जांच का नतीजा तथा आगे की पुलिस या बैंक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी आरोपी को दोषी बताना या लोन विवाद को हिंसा का औचित्य बनाना गलत होगा।

स्रोत और संदर्भ

  1. Dainik Jagran: पीलीभीत: लोन वसूली करने गए बैंक के मुख्य प्रबंधक पर व्यापारी का हमला, मुंह पर आई गंभीर चोटें; DVR लेकर फरार (2026-11-03)
  2. Live Hindustan: Pilibhit News: बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक और अफसरों से मारपीट, धमकाया (2026-11-03)
इस रिपोर्ट के बारे में
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