पंजाब नेशनल बैंक की ग्रेटर नोएडा स्थित ऐच्छर–सेक्टर पाई ब्रांच में कथित अनधिकृत लेनदेन के खिलाफ 2 नवंबर 2026 को खाताधारकों का प्रदर्शन तेज हुआ। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ब्रांच बंद करने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोका। Times of India के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने 58 शिकायतों में से 16 का समाधान होने की जानकारी दी, लेकिन बाकी रकम और समयसीमा को लेकर विवाद बना रहा।
2 नवंबर को ब्रांच के बाहर नया क्या हुआ?
इस बार नई घटना खाताधारकों का सार्वजनिक प्रदर्शन है, कोई दूसरी अलग धोखाधड़ी साबित होने की खबर नहीं। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ग्रेटर नोएडा स्थित ऐच्छर–सेक्टर पाई ब्रांच के बाहर किसान प्रतिनिधि और प्रभावित खाताधारक जमा हुए। उनकी मांग थी कि जिन बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से कथित तौर पर बिना अनुमति रकम निकाली गई, वह लौटाई जाए। Times of India और Navbharat Times की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोग ब्रांच का शटर गिराकर तालाबंदी करने लगे। पुलिस ने हस्तक्षेप किया। उपलब्ध रिपोर्टों में इस प्रदर्शन के दौरान किसी बैंक कर्मचारी के घायल होने या उस पर हमला होने की पुष्टि नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने रकम वापसी की साफ समयसीमा और संदिग्ध लेनदेन के मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की। Navbharat Times के अनुसार, समाधान नहीं मिलने पर PNB के दिल्ली मुख्यालय तक प्रदर्शन ले जाने की चेतावनी भी दी गई। इसे प्रदर्शनकारियों की मांग और चेतावनी ही समझना चाहिए, किसी जांच एजेंसी का अंतिम फैसला नहीं।
कितनी शिकायतों के समाधान की जानकारी दी गई?
3 नवंबर की Times of India रिपोर्ट में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस संतोष कुमार के हवाले से बताया गया कि 58 खाताधारकों की शिकायतें मिली थीं, जिनमें 16 का समाधान होने और करीब ₹7.8 करोड़ वापस किए जाने की बात कही गई। ये अखबार में पुलिस के हवाले से बताए गए आंकड़े हैं; हमने इन्हें बैंक के अंतिम ऑडिट किए हुए रिकॉर्ड से अलग सत्यापित नहीं किया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ खाताधारकों को लौटाई गई रकम निकालने से पहले Know Your Customer (KYC) प्रक्रिया दोबारा पूरी करनी पड़ सकती है।
यहां तारीखों का फर्क जरूरी है। New Indian Express ने 2 नवंबर को PNB के पहले जारी बयान के आधार पर बताया था कि तीन दावों में कुल ₹43 लाख का निपटारा हो चुका था। वह पहले की स्थिति थी, जबकि 16 शिकायतों और करीब ₹7.8 करोड़ वाला आंकड़ा बाद की पुलिस-संबंधी रिपोर्ट में आया है। दोनों को एक ही समय का अंतिम आंकड़ा मानना ठीक नहीं होगा। किसी रिपोर्ट से यह साबित नहीं होता कि सभी प्रभावित लोगों की पूरी रकम लौट चुकी है।
रिफंड की समयसीमा पर अलग-अलग बातें क्यों हैं?
Times of India की 3 नवंबर वाली रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा गया कि बाकी पात्र रकम शनिवार, 7 नवंबर तक लौटाने का भरोसा दिया गया। दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार, 5 नवंबर तक भुगतान करने की मांग रखी और आगे प्रदर्शन की चेतावनी दी। Navbharat Times ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ हुई बातचीत में भरोसा दिए जाने की सूचना दी है। ये रिपोर्ट किए गए आश्वासन और मांगें हैं। हमने इन तारीखों की गारंटी देने वाला कोई औपचारिक लिखित आदेश नहीं देखा। इसलिए इन्हें भुगतान पूरा हो जाने की पुष्टि नहीं समझना चाहिए।
मूल जांच और PNB की सार्वजनिक स्थिति
यह प्रदर्शन उसी पुरानी शिकायत से जुड़ा है, जिसमें PNB की ग्रेटर नोएडा ब्रांच के बचत खातों और FD में कथित अनधिकृत लेनदेन की जांच चल रही है। मामले में पुलिस और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के स्तर पर जांच की रिपोर्टें पहले सामने आ चुकी हैं। पहले के अलग-अलग स्रोतों में कुल संदिग्ध रकम को लेकर अलग अनुमान दिए गए थे। केवल नई प्रदर्शन-रिपोर्ट आने से वे अनुमान बैंक के अंतिम प्रमाणित नुकसान में नहीं बदल जाते। किसी कर्मचारी का सिस्टम लॉगिन रिकॉर्ड में दिखना अकेले उसकी जानबूझकर भागीदारी साबित नहीं करता। व्यक्तिगत जिम्मेदारी जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही तय होगी।
New Indian Express के जरिए सामने आए PNB के पुराने सार्वजनिक बयान में बैंक ने शिकायतों की प्राथमिकता से जांच, अधिकारियों को सहयोग और सभी सही दावों का सम्मान करने की बात कही थी। यह दावा नहीं है कि हर रिफंड पूरा हो गया है। 16 निपटाए गए मामलों का बैंक का ताजा स्वतंत्र दस्तावेज इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं था।
बैंक स्टाफ के लिए इसका क्या मतलब है?
ब्रांच में तालाबंदी की कोशिश और पुलिस का पहुंचना सीधे तौर पर कर्मचारियों की सुरक्षा तथा ग्राहकों की पहुंच से जुड़ा मामला है। शिकायतों की जांच के साथ स्टाफ को परेशान खाताधारकों की बात भी सुननी पड़ सकती है। इससे बिना प्रमाण किसी कर्मचारी को दोषी ठहराना सही नहीं होता। इसी घटना से कोई नया बैंक-व्यापी सर्विस रूल या सभी कर्मचारियों की लापरवाही भी साबित नहीं होती।
ब्रांच में सुरक्षित संवाद, लिखित शिकायतों का सही रिकॉर्ड और अधिकृत एस्केलेशन चैनल अहम हैं। इन रिपोर्टों के आधार पर कर्मचारियों के लिए कोई नया अनिवार्य ऑपरेशनल नियम घोषित नहीं किया जा सकता।
अब किन बातों की पुष्टि बाकी है?
- कितने बाकी खाताधारकों के दावे स्वीकार होंगे और रकम कब लौटेगी?
- पुलिस के हवाले से आए 16 शिकायतों और ₹7.8 करोड़ वाले आंकड़े की PNB की अपनी नई आधिकारिक पुष्टि कब मिलेगी?
- जांच में संदिग्ध कुल रकम, व्यक्तिगत जिम्मेदारी और अदालती नतीजा क्या होगा?
- 5 और 7 नवंबर की अलग-अलग समयसीमाओं के बाद स्थिति कैसे बदलती है?
एडिटोरियल संदर्भ: यह रिपोर्ट 2 नवंबर के नए प्रदर्शन, पुलिस हस्तक्षेप और शिकायतों के समाधान पर सामने आए नए आंकड़ों को कवर करती है। पहले से चल रही CBS लॉगिन संबंधी जांच को अलग नया घोटाला बताकर दोहराया नहीं गया है।
स्रोत और संदर्भ
- The Times of India — PNB fraud: Customers try to lock Greater Noida branch, seek full refunds by Thursday (2026-11-03)
- Navbharat Times — ग्रेटर नोएडा के किसानों ने PNB बैंक गबन मामले में महापंचायत की, दिल्ली मुख्यालय पर धरना देने की चेतावनी दी (2026-11-02)
- The New Indian Express — Genuine claims to be honoured, assures Punjab National Bank (2026-11-02)
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