दिल्ली हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को Unity Small Finance Bank की अपील खारिज करते हुए अधिकृत शेयर कैपिटल बढ़ाने से जुड़े एक खास बोर्ड एजेंडे पर अंतरिम रोक बनाए रखी। मामला BharatPe की मूल कंपनी Resilient Innovations और Centrum Financial Services के साथ शेयरधारक समझौते में पहले से लिखित सहमति लेने की शर्त से जुड़ा है। यह सभी बैंकों के लिए नया नियम नहीं है।

स्थितिInterim Order

दिल्ली हाई कोर्ट में क्या फैसला हुआ?

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार शामिल थे, ने Unity Small Finance Bank की अपील खारिज की। फैसला 5 नवंबर 2026 का है। बैंक ने अधिकृत शेयर कैपिटल बढ़ाने से जुड़े बोर्ड के एक प्रस्ताव पर लगी अंतरिम रोक को चुनौती दी थी।

मामले में दूसरा प्रमुख पक्ष Resilient Innovations Private Limited है, जो BharatPe की मूल कंपनी है। कोर्ट ने खास बोर्ड एजेंडे पर मिली अंतरिम सुरक्षा हटाने से इनकार किया। इससे सभी बैंकों पर कैपिटल बढ़ाने की स्थायी रोक नहीं लग गई है।

विवाद की असल वजह

रिपोर्ट के अनुसार, Unity Small Finance Bank के अधिकृत शेयर कैपिटल को ₹4,000 करोड़ से ₹4,900 करोड़ करने की योजना थी। विवाद वारंट और उनसे जुड़े शेयर प्रस्तावों तक भी पहुंचा। Resilient का कहना था कि उसके निवेश हिस्से में कमी आ सकती है। उसके मुताबिक यह विषय अक्टूबर 2021 में बैंक, Resilient और Centrum Financial Services के बीच हुए शेयरधारक समझौते में खास मंजूरी वाला मामला था।

समझौते के कुछ विषयों को ‘reserved matters’ कहा गया था, जिनके लिए पहले से लिखित सहमति की शर्त थी। कोर्ट ने समझौते, बोर्ड एजेंडे और बैंक के पत्राचार पर विचार किया। फैसले के पैराग्राफ 108–109 में बताया गया कि Agenda Item 18 इसी श्रेणी का विषय था और सहमति मांगने वाले पत्र बैंक ने खुद भेजे थे। बैंक की यह दलील स्वीकार नहीं हुई कि सहमति का उल्लेख गलती से हो गया था।

अंतरिम रोक की सही सीमा

एकल जज के पुराने आदेश में बोर्ड के खास Agenda Item 18 को आवश्यक सहमति के बिना पेश करने, उस पर विचार करने, चर्चा करने या मंजूर करने पर रोक लगाई गई थी। डिवीजन बेंच ने इस आदेश के खिलाफ अपील खारिज की। बोर्ड के दूसरे वैध कामों पर सामान्य रोक नहीं लगाई गई।

कोर्ट ने यह दलील भी स्वीकार नहीं की कि वारंट से जुड़ी RBI की जरूरतें पूरी करने और शेयरधारक समझौते का पालन करने में जरूरी तौर पर टकराव है। अदालत का कहना था कि अंतरिम आदेश का उद्देश्य लागू समझौते की प्रक्रिया का पालन कराना है। यह अभी अंतिम कारोबारी विवाद का फैसला नहीं है।

बैंक की बोर्ड, फाइनेंस और कंप्लायंस टीम के लिए सीख

जब किसी वित्तीय संस्थान में रणनीतिक निवेशक होते हैं, तो शेयरधारक समझौते में कुछ खास विषयों पर अलग मंजूरी जरूरी हो सकती है। बोर्ड सचिवालय को एजेंडा जारी करने से पहले ऐसी शर्तें देखनी चाहिए। फाइनेंस और कंप्लायंस टीम को मंजूरी और पत्राचार का रिकॉर्ड रखना चाहिए तथा अधिकृत कैपिटल और वास्तव में जारी या जमा शेयर कैपिटल का फर्क समझना चाहिए।

लेकिन यह एक निजी Small Finance Bank और उसके निवेशकों का अपना समझौता है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि सभी सरकारी बैंकों या RRBs पर यही निजी शेयरधारक मंजूरी लागू होगी। कोई निजी सहमति जरूरी कानूनी या नियामकीय मंजूरी का विकल्प भी नहीं है।

क्या तय हुआ और क्या बाकी है?

  • कोर्ट का मौजूदा कदम: डिवीजन बेंच ने अंतरिम रोक के खिलाफ बैंक की अपील खारिज की।
  • विवादित प्रस्ताव: अधिकृत कैपिटल ₹4,000 करोड़ से ₹4,900 करोड़ बढ़ाने का विषय था।
  • आगे का सवाल: समझौते से जुड़े पूरे अधिकार और आगे की मुख्य सुनवाई या मध्यस्थता में अंतिम फैसला अभी अलग विषय है।
  • जिसकी पुष्टि नहीं: यह साबित नहीं हुआ कि निवेश का हिस्सा वास्तव में घट गया या भविष्य के हर प्रस्ताव पर स्थायी रोक लग गई।

आदेश और खबर की तारीख

हाई कोर्ट का फैसला 5 नवंबर 2026 को आया और 5–6 नवंबर को खबरें सामने आईं। इसे 7 नवंबर को दिया गया नया आदेश नहीं बताया जा रहा। आगे कोई स्थगन, बदलाव या अंतिम फैसला आता है तो उसकी अलग पुष्टि जरूरी होगी।

स्रोत और संदर्भ

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